मुंबई

अजित पवार के निधन के बाद ‘घोटाला’, 75 स्कूलों को आनन-फानन में अल्पसंख्यक का दर्जा, CM ने लगाई रोक

महाराष्ट्र के 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगा दी गई है, साथ ही जांच के आदेश भी दिए गए है। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

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Feb 17, 2026
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)

महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दे दिया। ये वही संस्थान हैं, जिन्हें उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद मंजूरी दिए जाने की खबरें सामने आई थीं। अब पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।

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28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच जारी हुए 75 प्रमाण पत्र

अधिकारियों ने जानकारी दी कि 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच कुल 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया। पहला प्रमाण पत्र 28 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 9 मिनट पर जारी हुआ था। उल्लेखनीय है कि उसी दिन अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

बताया जा रहा है कि 28 जनवरी को ही सात संस्थानों को स्वीकृति दी गई और अगले तीन दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 तक पहुंच गई। उस समय अल्पसंख्यक विकास विभाग का प्रभार अजित पवार के पास था।

सुनेत्रा पवार ने दिए जांच के निर्देश

वर्तमान में यह विभाग उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार के पास है, जिन्होंने हाल ही में शपथ ली है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता की विस्तृत जांच की जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सभी स्वीकृतियों और अनुदानों पर अस्थायी रोक

सरकार के सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित अवधि के दौरान जारी की गई सभी स्वीकृतियों, अनुदानों और प्रमाण पत्रों को व्यापक समीक्षा पूरी होने तक रोक दिया जाए।

जांच में यह परखा जाएगा कि स्वीकृतियां किस प्रक्रिया के तहत दी गईं, क्या निर्धारित नियमों का पालन हुआ, और क्या अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने पर पहले से लागू किसी प्रतिबंध को औपचारिक रूप से हटाया गया था या नहीं।

विपक्ष की सख्त प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर रोहित पवार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अल्पसंख्यक दर्जे पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच के साथ-साथ सीआईडी जांच की भी मांग की है, ताकि पूरी जवाबदेही तय की जा सके।

क्या है आरोप?

प्यारे खान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र उसी दिन और अगले दिन जारी किए गए, जिस दिन अजित पवार का निधन हुआ था। कुछ लोगों ने उनके निधन का फायदा उठाया।

उन्होंने दावा किया कि जिन कुछ अल्पसंख्यक स्कूलों का उन्होंने दौरा किया, उनमें से 95 प्रतिशत स्कूल फर्जी पाए गए और भ्रष्टाचार में लिप्त थे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया था। इसमें 6 से 7 हजार लोगों की संलिप्तता सामने आई, जिनमें शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल है। हालांकि यह पूरा मामला बड़ा घोटाला प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर मकोका के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्यारे खान ने यह भी कहा कि जब उन्होंने पहले इस विषय पर अजित पवार से बात की थी, तो उन्होंने आश्वासन दिया था कि केवल अच्छे और योग्य स्कूलों को ही प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सीआईडी से कराई जानी चाहिए।

Updated on:
17 Feb 2026 07:46 am
Published on:
17 Feb 2026 07:45 am
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