आवारा कुत्ते के काटने के बाद रेबीज होने के डर से 30 वर्षीय एक बैंक कर्मचारी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। कल्याण शहर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण (Kalyan) शहर से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 30 वर्षीय एक बैंक कर्मचारी ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद रेबीज (Rabies) होने के डर से आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान अयास विश्वनाथ अमीन (Ayas Vishwanath Amin) के रूप में हुई है, जो कल्याण पूर्व के तीसगांव नाका इलाके में अपने परिवार के साथ रहते थे। अयास पिछले आठ वर्षों से भारत बैंक (Bharat Bank) की ठाणे शाखा में कार्यरत थे।
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले 30 साल के अयास को एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद उन्होंने एंटी-रेबीज वैक्सीन (Anti-Rabies Vaccine) ली, लेकिन परिवार का कहना है कि अयास ने केवल एक इंजेक्शन ही लिया था। इसके बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा। वह अपनी सेहत को लेकर बहुत अधिक चिंतित रहने लगा था। अयास को लग रहा था कि वैक्सीन लगाने के बावजूद उसमें रेबीज के लक्षण विकसित हो रहे हैं। इससे वह बेहद तनाव में था और इसी डर के चलते उसने रविवार को अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अयास को कुछ दिनों पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। इस घटना के बाद उन्होंने तुरंत इलाज शुरू किया और एंटी-रेबीज वैक्सीन का पहला इंजेक्शन भी लगवाया था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि घटना के बाद से ही अयास के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा था। वह बेहद चिंतित रहने लगा था और उसे यह डर सताने लगा था कि कहीं उन्हें रेबीज तो नहीं हो गया है।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इस पत्र में अयास ने स्पष्ट रूप से अपने डर का उल्लेख किया है। नोट में लिखा था कि कुत्ते के काटने के बाद वह इस बात से बेहद डरा हुआ हैं कि उसे रेबीज का संक्रमण हो जाएगा। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर ली है और आगे की जांच जारी है।
इस घटना ने स्वास्थ्य जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गलतफहमियों और जागरूकता की कमी का परिणाम है। रेबीज एक जानलेवा बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर और पूरे इलाज से इसे रोका जा सकता है। इसलिए कुत्ते के काटने पर घबराने की बजाय सही से इलाज करवाना जरूरी है।