महाराष्ट्र के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई शीर्ष समिति की बैठक में तीन प्रमुख ज्योतिर्लिंग मंदिरों भीमाशंकर, घृष्णेश्वर और परली वैजनाथ के कायाकल्प के लिए लगभग 684 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भव्य रूप देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। महायुति सरकार ने राज्य के छह प्रमुख तीर्थस्थलों, किलों और ऐतिहासिक स्थानों के विकास के लिए कुल 993.72 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी दी है। इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण, उनके बेहतर रखरखाव और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा। इस पूरे बजट में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी अकेले 684 करोड़ रुपये राज्य के तीन प्रमुख ज्योतिर्लिंग मंदिरों भीमाशंकर, घृष्णेश्वर और परली वैजनाथ पर खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली तीर्थस्थल विकास पर गठित शीर्ष समिति ने सोमबार को इन परियोजनाओं और फंड आवंटन को हरी झंडी दिखाई है। राज्य सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और धार्मिक विरासत का संरक्षण करना है।
पुणे जिले स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए 172.22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं छत्रपति संभाजीनगर जिले के वेरुल स्थित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के लिए 210.45 करोड़ रुपये की संशोधित योजना को मंजूरी मिली है। इसमें 53.82 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी शामिल है।
इसके अलावा बीड़ जिले में स्थित परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर के विकास के लिए 301.54 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को हरी झंडी दी गई है।
भीमाशंकर क्षेत्र विकास योजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक बस स्टेशन, पार्किंग सुविधा और बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार किया जाएगा। सरकार ने इस परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
यातायात की समस्या कम करने के लिए बाईपास सड़कें बनाई जाएंगी और मौजूदा 2.7 मीटर चौड़ी सड़कों को बढ़ाकर 7 मीटर किया जाएगा। इसके साथ ही पैदल यात्रियों के लिए विशेष मार्ग, ढके हुए कॉरिडोर और मंदिर परिसर में नया फर्श निर्माण भी किया जाएगा।
परियोजना के तहत मंदिर परिसर में एम्फीथिएटर, 257 KLD क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नया पुलिस स्टेशन और विश्राम गृह भी बनाए जाएंगे। भविष्य की योजनाओं में दिंभे बांध क्षेत्र में सब-स्टेशन, रोपवे सुविधा और एमटीडीसी के भीमाशंकर रिजॉर्ट का विकास भी शामिल है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं कि मंदिर विकास कार्य तय समयसीमा में तीन चरणों में पूरे किए जाएं।
पहले चरण में मंदिर परिसर में भव्य प्रवेश द्वार, डिजिटल कतार प्रबंधन प्रणाली, प्रतीक्षा कक्ष, अन्नक्षेत्र, योग और ध्यान केंद्र बनाए जाएंगे। साथ ही पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
दूसरे चरण में पवित्र जल स्रोतों और प्राचीन धार्मिक स्थलों का विकास किया जाएगा। इसमें हरिहर और मार्कंडेय तीर्थ का वैज्ञानिक पुनर्जीवन, घाट, साइकिल ट्रैक, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं, फूड कोर्ट और सीसीटीवी सिस्टम शामिल होंगे।
तीसरे चरण में मेरु पर्वत विकास योजना के तहत भगवान शिव की विशाल प्रतिमा, शिव पुराण और वैदिक संग्रहालय, एम्फीथिएटर, लेजर लाइट एंड साउंड शो तथा ध्यान केंद्र विकसित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और जीर्णोद्धार सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद महाराष्ट्र में धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकेंगी।