
महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (MSHRC) ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मंत्री पंकजा मुंडे के काफिले को रोकने वाले प्रदर्शनी को लात मारने वाले अधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में जालना के डिप्टी एसपी (DySP) अनंत कुलकर्णी को प्रदर्शनकारी को कूदकर लात मारते हुए देखा जा सकता है। जबकि प्रदर्शनकारी को कुछ पुलिसकर्मी पकड़े हुए दिख रहे है। इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने जालना के पुलिस अधीक्षक (SP) और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।
मानवाधिकार आयोग ने कहा कि वीडियो में दिख रहे पुलिस अधिकारी का व्यवहार औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है और भारतीय संविधान में दिए गए नागरिक के जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है। आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कानूनी जांच की आवश्यकता बताई है। इसके साथ ही मानवाधिकार आयोग ने जालना एसपी को निर्देश दिया है कि वे इस घटना की प्राथमिक तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें।
वहीं, सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारी अनंत कुलकर्णी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी गोपाल चौधरी आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे और उसी को रोकने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया।
दरअसल एक मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही थी। गिरफ्तारी की मांग को लेकर एक परिवार एक महीने से जालना के जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठा था। लेकिन उनकी मांग पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जालना की संरक्षक मंत्री पंकजा मुंडे ध्वजारोहण के लिए पहुंचीं तो परिवार ने उनसे मिलने की कोशिश की और उनका काफिला रोकने का प्रयास किया।
धरने पर बैठे अमित चौधरी और गोपाल चौधरी का आरोप है कि पुलिस आरोपियों को बचा रही है और हमें परेशान कर रही है। 15 अगस्त को जब उन्होंने मंत्री पंकजा मुंडे से मिलने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया और जबरन ले जाने लगी। इसी दौरान डिप्टी एसपी अनंत कुलकर्णी पीछे से दौड़कर आए लात मार दी। हालांकि अब देखना होगा कि आयोग के कड़े रुख के बाद इस पूरे प्रकरण पर आगे क्या कार्रवाई होती है।