MNS Protest Hindi Exam: महाराष्ट्र सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित हिंदी भाषा परीक्षा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कड़े विरोध के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
महाराष्ट्र में भाषा को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। इस बीच राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित हिंदी भाषा परीक्षा पर रोक लगा दी है। यह फैसला महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS), शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और मराठी संगठनों के विरोध के बाद लिया गया है।
मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा कि 28 जून को होने वाली हिंदी भाषा परीक्षा स्थगित कर दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार अब यह भी समीक्षा करेगी कि सरकारी कर्मचारियों के लिए इस परीक्षा की आवश्यकता है या नहीं। अगर जरूरत नहीं पाई गई, तो भविष्य में इसे हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा।
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार के भाषा निदेशालय ने 9 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के विभागीय केंद्रों पर 28 जून को हिंदी की लोअर ग्रेड और हायर ग्रेड परीक्षाएं आयोजित करने की घोषणा की गई थी। यह परीक्षा राजपत्रित और गैर-राजपत्रित सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए थी। सभी सरकारी विभागों को 20 मई से पहले आवेदन भेजने के निर्देश दिए गए थे।
नोटिफिकेशन के अनुसार लोअर ग्रेड परीक्षा महाराष्ट्र राज्य बोर्ड की कक्षा 10 की ‘लोकभारती’ हिंदी पुस्तक पर आधारित थी, जबकि हायर ग्रेड परीक्षा ‘कुमारभारती’ हिंदी पाठ्यपुस्तक के आधार पर होने वाली थी।
लेकिन मराठी भाषा से जुड़े संगठनों के साथ ही राज ठाकरे की मनसे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने सवाल उठाया कि जब महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा मराठी है, तो सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी की परीक्षा अनिवार्य क्यों की जा रही है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब राज्य सरकार हाल ही में टैक्सी-ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने की दिशा में कदम उठा चुकी है। ऐसे में हिंदी परीक्षा को लेकर भाषा और क्षेत्रीय पहचान की बहस और तेज हो गई।
मनसे और मराठी अभ्यास केंद्र का कहना था कि भले ही यह परीक्षा पुरानी व्यवस्था का हिस्सा रही हो, लेकिन इसे जारी रखना यह संदेश देता है कि मराठी भाषी राज्य में हिंदी को प्राथमिकता दी जा रही है। महाराष्ट्र के सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा की जरूरत क्या है?
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने भाजपा नीत महायुति सरकार पर पिछले दरवाजे से हिंदी थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 28 जून को परीक्षा आयोजित की गई तो परीक्षा केंद्रों पर आंदोलन होगा।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान होना चाहिए और जब मराठी राज्यभाषा है, तो यहां के अधिकारियों को हिंदी परीक्षा देने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है। महायुति सरकार दिल्ली के नेताओं को खुश करने के लिए यह सब कर रही है और गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच, मराठी अभ्यास केंद्र के अध्यक्ष दीपक पवार ने इस फैसले को जीत बताते हुए परीक्षा को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे मराठी भाषी राज्य में सरकारी सेवा की शर्तों में हिंदी परीक्षा शामिल करना अनावश्यक है। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भी ऐसी परीक्षाएं आयोजित होती हैं।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा की व्यवस्था महाराष्ट्र राज्य बनने से पहले की है। इसे तत्कालीन बॉम्बे सरकार ने 1951 में लागू किया था। 1 सितंबर 1951 के सरकारी प्रस्ताव के तहत सरकारी कर्मचारियों को नियुक्ति के तीन वर्षों के भीतर मान्यता प्राप्त हिंदी परीक्षा पास करना अनिवार्य था। ऐसा न करने पर वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है और नए कर्मचारियों को नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
हालांकि समय के साथ कई छूट भी दी गईं। दसवीं (SSC) या कॉलेज स्तर पर हिंदी पढ़ चुके कर्मचारी, 45 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ और हिंदी मातृभाषा वाले कर्मचारियों को परीक्षा से राहत दी गई।
अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक हिंदी की हायर ग्रेड परीक्षा में अब तक 33 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो चुके हैं, जबकि लोअर ग्रेड परीक्षा में 4600 से ज्यादा लोग भाग ले चुके हैं।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह परीक्षा लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया का हिस्सा थी, लेकिन अब विभिन्न संगठनों की आपत्तियों के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।