महाराष्ट्र में टीबी रोकथाम की जांच कर रहे डिपार्टमेंट ने हैरान कर देने वाली जानकारी सामने लाई है। जहां महाराष्ट्र में करीब 9 हजार लोग ऐसे हैं जो कि टीबी और डायबिटीज दोनों से ही पीड़ित हैं। जिसके बाद ऐसे मरीजों का इलाज करने के साथ ही हेल्थ डिपार्टमेंट की टीमें घर-घर जाकर लगातार स्क्रीनिंग कर रही हैं।
महाराष्ट्र के तपेदिक रोधी प्रकोष्ठ ने डायबिटीज और टीबी को मिलाकर दोनों बीमारियों के करीब 9,780 मरीजों का पता लगाया है। यह पता लगाना इसलिए जरूरी है क्योंकि डायबिटीज से टीबी विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कि रोगियों की बीमारी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके साथ ही टीबी और डायबिटीज रोगियों में शर्करा नियंत्रण को बाधित भी कर सकता है। अधिकारियों ने बताया कि पहचान किए गए इन सभी 9 हजार रोगियों का पता 1 जनवरी से 30 सितंबर के बीच चला था। इन मरीजों की जानकारी राज्यव्यापी टीबी अभियान के दौरान पता चली थी।
अधिकारियों के मुताबिक, अब इन मरीजों को स्पेशल देखभाल की पेशकश की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे दोनों ही स्थितियों से लड़ने में सक्षम हैं। सब मिलाकर, स्पेशल ऑपरेशन के तहत 1.67 लाख रोगियों के बारे में पता लगाया गया। मरीजों की इन तादाद में से 1,50,107 का डायबिटीज परीक्षण भी किया गया। इस ऑपरेशन के दौरान महाराष्ट्र में मुंबई ने ही कुल टीबी के मामलों की सबसे अधिक 1.67 लाख (25%) में से 42,263 संख्या दर्ज की। यह भी पढ़ें: Maharashtra News: ठाकरे खेमे के समर्थन में बनाए थे 4,500 शपथ पत्र, पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
डायबिटीज टीबी रोगियों की बात करें तो कुल 9780 मामलों में से मुंबई में 3,227 मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अभी भी स्पेशल ऑपरेशन जारी है। डॉ रामजी अडकेकर जो कि स्वास्थ्य सेवा, महाराष्ट्र के संयुक्त निदेशक (टीबी) है उन्होंने भी इसको लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान का टारगेट टीबी या टीबी जैसे लक्षणों के लिए 8.66 करोड़ लोगों की जांच करना है।
रामजी अडकेकर ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में इन बीमारियों की रोकथाम के लिए एक कार्यक्रम की भी शुरूआत की गई है। जिसके तहत गैर सरकारी संगठनों, चैरिटी, कंपनियों और यहां तक कि हर किसी आम लोगों को भी टीबी रोगियों की आर्थिक मदद करने की इजाजत है। डायबिटीज और टीबी दोनों बीमारियों के इलाज के लिए सरकार के माध्यम से दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए जो सहायता कार्यक्रम भी शुरू किया गया है उसके तहत यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास किया जा रही है कि इन रोगियों को संतुलित और पौष्टिक आहार मिले।