Maharashtra Politics: शिवसेना शिंदे गुट में नाराजगी का एक कारण हाल ही में स्वतंत्रता दिवस ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए जारी की गई मंत्रियों की सूची को भी बताया जा रहा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में आज हुई कैबिनेट बैठक (Maharashtra Cabinet Meeting) में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसमें महाराष्ट्र पुलिस बल में लगभग 15 हजार पदों पर भर्ती को हरी झंडी देना भी शामिल है। हालांकि इस कैबिनेट बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मंत्री भरत गोगावले मौजूद नहीं थे। उनके अनुपस्थित रहने के अलग-अलग राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे इस समय श्रीनगर दौरे पर हैं, जहां वे एक रक्तदान कार्यक्रम में शामिल हुए। इसी वजह से वे मुंबई लौटकर बैठक में शामिल नहीं हो सके। वहीं, शिवसेना नेता व महाराष्ट्र के रोजगार गारंटी योजना मंत्री भरत गोगावले ने खुद बताया कि वे निजी काम से दिल्ली गए हैं, इसलिए कैबिनेट बैठक में नहीं आ पाए। उन्होंने नाराजगी की खबरों को खारिज किया है।
हालांकि, दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी को राज्य की वर्तमान सियासी खींचतान से भी जोड़ा जा रहा है। महायुति सरकार में इन दिनों प्रभारी मंत्री पद (पालक मंत्री) को लेकर विवाद चल रहा है। नासिक और रायगढ़ जिलों के पालक मंत्री पदों को लेकर शिंदे गुट में नाराजगी की खबरें पहले से हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट में नाराजगी का एक कारण हाल ही में स्वतंत्रता दिवस ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए जारी की गई महाराष्ट्र के मंत्रियों की सूची को लेकर भी है। इस सूची में नासिक में भाजपा के मंत्री गिरीश महाजन और रायगड में एनसीपी अजित गुट की मंत्री अदिती तटकरे को मौका दिया गया है। इस वजह से शिंदे सेना के नेता नाखुश बताये जा रहे है। ऐसे में शिंदे और गोगावले की गैरहाजिरी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है कि महायुति सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
इस साल की शुरुआत में नासिक और रायगढ़ जिलों के प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई थी, क्योंकि इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ महायुति में विवाद शुरू हो गया था। महायुति में भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल हैं। महायुति सरकार ने 18 जनवरी को जिला प्रभारी मंत्रियों की सूची की घोषणा की, जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अदिति तटकरे को रायगढ़ और भाजपा नेता गिरीश महाजन को नासिक की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि, इससे असंतोष पैदा होने के चलते सीएम फडणवीस ने 19 जनवरी को इन दोनों नियुक्तियों पर रोक लगा दी।