Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों विपक्ष के सांसदों और सत्ताधारी नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकी चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि महाविकास आघाडी (MVA) खासकर शिवसेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट के कई सांसद टूटने की कगार पर है।
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। महाविकास आघाड़ी (MVA) के कई सांसदों, खासकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं की सत्ताधारी महायुति के शीर्ष नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकियां अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई हैं। बताया जा रहा है कि विपक्षी खेमे के कम से कम एक दर्जन सांसद सत्ताधारी गठबंधन (महायुति) के संपर्क में हैं।
सत्ताधारी भाजपा और शिवसेना के नेताओं का दावा है कि एमवीए के कई सांसद भविष्य में दलबदल की तैयारी में है। वहीं विपक्षी नेताओं का कहना है कि सांसद सिर्फ अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सत्ता पक्ष के नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं।
हाल ही में दो घटनाओं ने इन अटकलों को और हवा दे दी। पिछले सप्ताह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (UBT) सांसद संजय दीना पाटिल एक ही गाड़ी में साथ नजर आए। बताया गया कि शिंदे सड़क हादसे में घायल हुई पाटिल की पत्नी से मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में मिलने पहुंचे थे, जिसके बाद दोनों साथ रवाना हुए। संजय दीना पाटिल उत्तर-पूर्वी मुंबई से शिवसेना (UBT) सांसद है।
इसके अलावा शिवसेना (UBT) सांसद संजय जाधव ने उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठकों से दूरी बनाई और सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया कि वह भविष्य में दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। इसके बाद उनके भाजपा के करीब जाने की चर्चाएं तेज हो गईं।
एनसीपी (शरद पवार) के सोलापुर से सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटिल की भी एकनाथ शिंदे के साथ बढ़ती नजदीकियों की चर्चा राजनीतिक हलकों में हो रही है।
सत्तारूढ़ महायुति में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (सुनेत्रा पवार) शामिल है, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और एनसीपी (शरद पवार) विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) का हिस्सा है।
2024 के लोकसभा चुनाव में महाविकास आघाड़ी ने महाराष्ट्र की 48 में से 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि महायुति को सिर्फ 17 सीटें मिली थीं। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई थी, जिसने बाद में कांग्रेस का समर्थन कर दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव परिणाम आने के बाद एकनाथ शिंदे ने भाजपा नेतृत्व से कहा था कि वह विपक्षी दलों के कुछ सांसदों को अपनी पार्टी और महायुति में ला सकते हैं। हालांकि उस समय भाजपा नेतृत्व ने किसी भी तरह के दलबदल में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई थी।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया कि अगर भविष्य में कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ना चाहता है तो भाजपा उन्हें अपने दल में शामिल करना पसंद करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दलबदल का सही समय नहीं है और यह प्रक्रिया एक-दो साल बाद तेज हो सकती है।