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महाराष्ट्र की राजनीति में फिर उबाल: पवार परिवार में सियासी घमासान के 4 संकेत, बड़े नेता की खुली चेतावनी

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर मतभेदों की चर्चा तेज है। 2023 में एनसीपी में हुई बगावत के बाद परिवार में जो दरार पड़ी थी, वह अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
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Updated: 7 Nov 2026, 1:34 PM IST
Sharad Sunetra Pawar NCP merger
महाराष्ट्र में पवार परिवार में फिर बढ़ी सियासी हलचल (Photo: IANS)

Pawar family rift: महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। साल 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो गुटों में बंटवारे के बाद अब पार्टी के भीतर नए सियासी समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। दिवंगत अजित पवार की पत्नी और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली NCP में अंदरूनी खींचतान की खबरों के बीच शरद पवार के पोते और विधायक रोहित पवार ने अपनी ही चाची सुनेत्रा पवार और उनके दोनों बेटों पार्थ पवार तथा जय पवार को सतर्क रहने की सलाह दी है।

रोहित पवार ने परिवार के सदस्य के तौर पर आगाह करते हुए कहा कि पार्थ पवार, जय पवार और सुनेत्रा काकी को बीजेपी की राजनीतिक रणनीतियों और उनके करीबी कुछ नेताओं की भूमिका को समझना चाहिए। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सवाल उठने लगे हैं कि क्या NCP के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है? क्या पार्टी में नेतृत्व और फैसले लेने के अधिकार को लेकर असंतोष बढ़ रहा है?

हालांकि, NCP ने पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी या सत्ता संघर्ष की खबरों को खारिज किया है। ऐसे में पवार परिवार के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल को समझने के लिए हाल के घटनाक्रमों पर नजर डालना जरूरी है।

अमित शाह से NCP नेताओं की मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा

हाल ही में NCP के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक को लेकर मीडिया में खबरें आईं कि नेताओं ने अमित शाह के सामने पार्टी सांसद पार्थ पवार के एकतरफा कामकाज और संगठन में उचित तालमेल की कमी का मुद्दा उठाया था। हालांकि, NCP ने इन खबरों को गलत बताते हुए खारिज कर दिया।

इस मुलाकात के बाद सुनेत्रा पवार ने अपने आधिकारिक आवास देवगिरी पर पार्टी की कोर कमेटी की आपात बैठक बुलाई। एक सप्ताह के भीतर यह कोर कमेटी की दूसरी बैठक थी। पहली बैठक वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात के बाद हुई थी।

बताया गया कि बैठक में पार्टी के विधायकों और मंत्रियों ने संगठन के भीतर मतभेदों को लेकर चिंता जताई। नेताओं का मानना था कि आपसी एकजुटता की कमी से पार्टी कमजोर हो रही है। इन घटनाओं ने NCP के भीतर संभावित असंतोष की चर्चाओं को और हवा दी।

अजित पवार के निधन के बाद बदले पार्टी के समीकरण

दरअसल, जनवरी 2026 में एक विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद NCP की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। अजित पवार के रहते उनके गुट का पार्टी संगठन और राजनीतिक फैसलों पर मजबूत नियंत्रण था। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व वाले गुट ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और महाराष्ट्र की महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री बनीं। इसके साथ ही उनके बेटे पार्थ और जय पवार भी पार्टी के फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

हालांकि, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता लंबे समय से अजित पवार के साथ काम करते रहे हैं। ऐसे में संगठन के फैसलों में उनकी भूमिका कम होने और नई पीढ़ी के बढ़ते प्रभाव को लेकर असंतोष की खबरें सामने आई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी के कामकाज में सामूहिक नेतृत्व और बेहतर समन्वय की मांग कर रहे हैं। अमित शाह के साथ हुई मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

शरद पवार के लिए PM मोदी का संदेश भी चर्चा में

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शरद पवार के लिए आया संदेश भी चर्चा का विषय बन गया है। अस्पताल में भर्ती शरद पवार से प्रधानमंत्री मोदी ने फोन पर बात की और उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखने तथा आराम करने की सलाह दी।

बताया गया कि इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे। आप अपनी सेहत का ध्यान रखिए और आराम कीजिए। आपका आशीर्वाद हमारे साथ बना रहे।"

प्रधानमंत्री के इस संदेश के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच पहले भी राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और संवाद देखने को मिला है।

जुलाई 2026 में शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान पवार ने किसानों की समस्याओं और सिंचाई से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा था।

इससे पहले फरवरी 2025 में भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान 84 वर्षीय शरद पवार को कुर्सी पर बैठने में मदद की थी और उन्हें पानी का गिलास दिया था। अगस्त 2023 में पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के दौरान भी दोनों नेता एक मंच पर नजर आए थे।

केंद्रीय मंत्री के बयान से भी बढ़ी अटकलें

इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास आठवले के बयान ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है।

आठवले ने दावा किया कि यदि सुप्रिया सुले NDA में शामिल होती हैं, तो केंद्र सरकार के अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद शरद पवार गुट और बीजेपी के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं।

हालांकि, सुप्रिया सुले के NDA में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

क्या NCP के दोनों गुटों का फिर हो सकता है विलय?

महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के एक होने की चर्चा नई नहीं है। 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद भी कई बार दोनों गुटों के बीच नजदीकियां बढ़ने और विलय की संभावनाओं को लेकर खबरें सामने आई थीं।

अजित पवार के निधन के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया था। लेकिन अब पार्टी के भीतर कथित असंतोष, वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात और रोहित पवार की चेतावनी ने एक बार फिर विलय की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि NCP के वरिष्ठ नेताओं के बीच शरद पवार गुट के साथ संभावित विलय को लेकर भी चर्चा हुई है। हालांकि, इस पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक सहमति सामने नहीं आई है।

दूसरी ओर, NCP के राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेश पाटिल ने पार्टी में किसी भी तरह के सत्ता संघर्ष या नेतृत्व विवाद की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अमित शाह से मुलाकात पहले से तय थी और इसके लिए खुद सुनेत्रा पवार ने समय मांगा था।

पाटिल के मुताबिक, अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ तथा जय ने खुद को पूरी तरह पार्टी के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट है और मीडिया में आ रही खबरों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

फिलहाल पवार परिवार और NCP के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कई सवाल हैं, लेकिन किसी नए राजनीतिक गठबंधन या पार्टी विलय पर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, सुनेत्रा पवार का नेतृत्व और पार्थ-जय पवार की राजनीतिक सक्रियता महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम मुद्दे हो सकते हैं।

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7 Nov 2026, 1:34 PM IST
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