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3.92 करोड़ के घोटाले में फंसी ‘नागजिला’, सलाहकार पर लगे गंभीर आरोप, अब कोर्ट ने सुनाया फैसला

Nagzila Financial Scam: 3.92 करोड़ के कथित घोटाले और वित्तीय विवाद से जुड़े मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सलाहकार कुलदीप सिंह चंपावत को राहत दी है। जानिए कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा है।
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मुंबई

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Shiwani Mishra

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Updated: 7 Nov 2026, 12:40 PM IST

Nagzila financial scam

फिल्म 'नागजिला' विवादों में (सोर्स: X-@1lsBongofficial)

Nagzila film Production Dispute: कार्तिक आर्यन और करण जौहर की अपकमिंग फिल्म 'नागजिला: नाग लोक का पहला कांड' रिलीज से पहले कानूनी विवाद में घिर गई है। बता दें, करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन और घोटाले से जुड़े मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिल्म के इंटरनल ऑडिट में कंसल्टेंट कुलदीप सिंह चंपावत को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। यह पूरा मामला दो प्रोडक्शन कंपनियों के बीच हुए वित्तीय विवाद और करीब 3.92 करोड़ रुपये के अनधिकृत (Unauthorized) भुगतान से जुड़ा है, जिसकी जांच मुंबई पुलिस कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा कानूनी शिकंजा 26 सितंबर, 2026 को मुंबई के डी.एन. नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एक एफआईआर (FIR) से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दो प्रोडक्शन कंपनियों के बीच तय मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी (SOP) के नियमों को ताक पर रखकर 3,92,76,308 रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में कुलदीप सिंह चंपावत की संलिप्तता को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलें

मामلا की सुनवाई के दौरान कुलदीप सिंह चंपावत की ओर से पैरवी कर रहे वकील नितिन प्रधान ने अदालत के सामने मजबूत तर्क रखे। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल इस पूरे प्रोजेक्ट में केवल एक सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे। उनके पास किसी भी तरह के भुगतान को मंजूरी देने या उसे अपने स्तर पर जारी करने का कोई अधिकार नहीं था। कोर्ट को बताया गया कि वित्तीय फैसले चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा लिए जाते थे और चंपावत पैसों के लेन-देन या भुगतान की आधिकारिक प्रक्रिया (hierarchy) का हिस्सा बिल्कुल नहीं थे।

हाई कोर्ट का फैसला और निर्देश

इन सभी दलीलों और तथ्यों पर गौर करने के बाद, जस्टिस प्रफुल्ल एस. खुबलकर ने 3 नवंबर, 2026 को अपना आदेश सुनाया। हाई कोर्ट ने माना कि भुगतान की व्यवस्था और मंजूरी देने वाली प्रणाली में कुलदीप सिंह चंपावत की कोई विशेष या प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। इसके अलावा, अदालत ने इस बात को भी संज्ञान में लिया कि उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है।

राहत देते हुए अदालत ने चंपावत को जांच में पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, उन्हें 12 नवंबर, 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच डी.एन. नगर पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया है। साथ ही, जांच अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर उन्हें सभी जरूरी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है।