
Maharashtra Shaktipeeth Expressway News: महाराष्ट्र के बहुचर्चित शक्तिपीठ महामार्ग (Shaktipeeth Expressway) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने संभावित शक्तिपीठ महामार्ग के लिए नई अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। संशोधित योजना के तहत अब इस महामार्ग का रूट बदल दिया गया है। नई अधिसूचना के अनुसार, सातारा जिले को भी इस परियोजना में शामिल किया गया है और यह मार्ग जिले के मान (Man) और खटाव (Khatav) तहसीलों के 19 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके लिए इन गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
शक्तिपीठ महामार्ग की घोषणा के बाद से ही यह परियोजना लगातार विवादों में रही है। खासकर भूमि अधिग्रहण को लेकर कई जिलों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। इसी विरोध के बाद सरकार ने परियोजना के मूल रूट में बदलाव किया है।
संशोधित योजना के अनुसार, शक्तिपीठ महामार्ग अब राज्य महामार्ग क्रमांक एसएच-10 के नाम से जाना जाएगा। पहले प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग की लंबाई 802 किलोमीटर थी और यह 12 जिलों से होकर गुजरने वाला था। लेकिन विरोध के चलते इसके मार्ग में बदलाव किया गया और अब नई अधिसूचना जारी की गई है।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जारी की गई नई अधिसूचना के अनुसार, सातारा जिले के दो प्रमुख तालुकाओं के कुल 19 गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। जिसमें मान तहसील के कारखेल, हवालदारवाडी, पर्यंती, भाटकी, खड़की, वरकुटे-म्हसवड, मालवाडी, वाकी, दिवड, दिडवाघवाडी, ढाकणी, गटेवाडी, वडजल और कुकुडवाड गांव शामिल है। जबकि खटाव तहसील के कान्हारवाडी, हिवरवाडी, ढोकळवाडी, कानकात्रे और मायणी गांव शामिल हैं।
शक्तिपीठ महामार्ग महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। यह 6-लेन का एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे वर्धा जिले के दिग्रस से शुरू होकर सिंधुदुर्ग जिले के बांदा तक जाएगा।
संशोधित डीपीआर के अनुसार अब इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 856 किलोमीटर होगी, जो पहले प्रस्तावित मार्ग से 54 किलोमीटर अधिक है। नई योजना के मुताबिक, शक्तिपीठ महामार्ग सोलापुर जिले से सातारा में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह मान तहसील से गुजरते हुए खटाव तहसील के कुछ गांवों से होकर सांगली जिले में प्रवेश करेगा।
सरकार का दावा है कि शक्तिपीठ महामार्ग बनने के बाद नागपुर से गोवा की यात्रा का समय 18 घंटे से घटकर लगभग 8 घंटे रह जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों, 40 तहसीलों और लगभग 400 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा, परियोजना के जरिए राज्य के 21 प्रमुख धार्मिक स्थलों (शक्तिपीठों) को आपस में जोड़ने की भी योजना है, जिससे धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।