
Facebook WhatsApp News: सोशल मीडिया आज राजनीति का बड़ा हथियार बन चुका है। नेता अपनी बात लोगों तक पहुंचाने से लेकर अपनी छवि बनाने तक के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय फेसबुक और व्हाट्सऐप पर वैसी सख्ती होती, जैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में इंस्टाग्राम को लेकर हो रही है, तो क्या मोदी आज इस मुकाम तक पहुंच पाते?
दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह सवाल उठाया। उनकी टिप्पणी में सोशल मीडिया की भूमिका और राजनीति में उसकी अहमियत को लेकर सवाल किया गया है। हालांकि, यह उनका नजरिया है, न कि ऐसा कोई तथ्य जिससे यह साबित हो कि सोशल मीडिया पर सख्ती से मोदी की राजनीतिक यात्रा बदल जाती।
एक दशक पहले तक राजनीतिक दलों के पास लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए रैलियां, सभाएं, अखबार और टीवी जैसे प्रमुख माध्यम थे। फेसबुक और व्हाट्सऐप के बढ़ते इस्तेमाल ने इस तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया। अब नेता और उनकी टीमें सीधे लोगों तक संदेश पहुंचा सकती हैं। समर्थक पोस्ट और वीडियो साझा करके किसी मुद्दे को तेजी से चर्चा में ला सकते हैं।
नरेंद्र मोदी और भाजपा ने भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों तक अपनी बात पहुंचाई है। आज इंस्टाग्राम जैसे मंच भी राजनीतिक प्रचार का अहम हिस्सा बन गए हैं। यहां छोटे वीडियो, तस्वीरों और सीधे संदेशों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों से जुड़ने की कोशिश की जाती है।
दीपके की टिप्पणी का एक पहलू यह भी है कि सोशल मीडिया पर सरकार की सख्ती का असर राजनीतिक संवाद पर कितना पड़ सकता है। अगर किसी मंच पर सामग्री हटाने, खाते बंद करने या पोस्ट की पहुंच सीमित करने जैसे कदम उठाए जाते हैं, तो यह बहस शुरू हो जाती है कि नियमों का पालन कराया जा रहा है या लोगों की आवाज पर रोक लग रही है।
हालांकि, हर कार्रवाई के पीछे की वजह अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक मंच पर हुई कार्रवाई को दूसरे मंचों से जोड़कर देखना भी सावधानी मांगता है।
दीपके का सवाल इसी बहस को सामने लाता है कि सोशल मीडिया ने राजनीति को कितना बदला है और अगर इन मंचों पर सख्ती होती, तो नेताओं के जनता तक पहुंचने के तरीके कैसे अलग होते। इसका पक्का जवाब देना संभव नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि आज सोशल मीडिया राजनीति में अपनी बात रखने और लोगों की राय बनाने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है।