
Manoj Jarange Patil: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल मुंबई जाने के अपने फैसले पर कायम हैं। तबीयत में कमजोरी के चलते उन्होंने बुधवार को बीड के पटोदा में अपना ठहराव बढ़ाया था। अब उन्होंने गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे पटोदा से मुंबई के लिए रवाना होने का ऐलान किया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से जरांगे को आंदोलन स्थगित करने के लिए मनाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। मनोज जरांगे मंगलवार को अंतर्वली सराटी से मुंबई में आंदोलन के लिए निकले थे। देर रात उनका काफिला बीड जिले के पटोदा पहुंचा था। यहां उन्होंने समर्थकों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इसी दौरान उनकी तबीयत की भी जांच की गई।
जरांगे की तबीयत को देखते हुए जिला सर्जन सतीश कुमार सोलंके मेडिकल टीम के साथ पटोदा पहुंचे। जांच के दौरान उनका ब्लड प्रेशर काफी कम पाया गया। डॉक्टर के मुताबिक, उनके शरीर में पानी की भी कमी थी। जिला सर्जन ने जरांगे से इलाज कराने का आग्रह किया और उन्हें आगे की यात्रा करने के बजाय अस्पताल में भर्ती होकर उपचार लेने की सलाह दी। जरांगे ने इलाज कराने का अनुरोध स्वीकार किया।
बुधवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में जरांगे ने बताया कि नारायणगढ़ के एच.बी.पी. शिवाजी महाराज के अनुरोध पर उन्होंने सलाइन ली। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह बुधवार को मुंबई के लिए रवाना होने के बजाय गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे पटोदा से आगे की यात्रा शुरू करेंगे। जरांगे ने कहा कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों को पूरा किया है, लेकिन आंदोलन वापस लेने का फैसला तभी होगा जब मुख्यमंत्री हैदराबाद जीआर और सतारा-कोल्हापुर गजट में संशोधन को समयबद्ध तरीके से लागू करने का आश्वासन देंगे।
मनोज जरांगे ने सरकार से हैदराबाद गजट जीआर में संशोधन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह आश्वासन भी देना चाहिए कि 58 लाख रिकॉर्ड प्रभावित नहीं होंगे और कुनबी प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर कोई समस्या नहीं आएगी।
उन्होंने सतारा और कोल्हापुर गजट जारी किए जाने की समयसीमा को लेकर भी सरकार से स्पष्ट आश्वासन मांगा। जरांगे ने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से एक नए मसौदे की जानकारी मिली है और वह मसौदा देखने के बाद इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
जरांगे के मुंबई जाने के फैसले के बीच राज्य सरकार भी उन्हें मनाने के प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से कई मंत्रियों ने आंदोलन स्थगित करने की अपील की है। सरकार की कोशिश है कि बातचीत के जरिए उनकी मांगों पर समाधान निकाला जाए और जरांगे मुंबई की ओर आगे न बढ़ें। वहीं, जरांगे ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वह मुंबई जाने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगे।
जरांगे ने अपने काफिले के साथ चल रहे मराठा प्रदर्शनकारियों से भी गांव लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो लोग पटोदा में रुके हुए हैं, वे अपने गांव वापस चले जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मुंबई जाने से रोका गया तो वह फोन के जरिए इसकी जानकारी देंगे। अब सभी की नजरें गुरुवार दोपहर पटोदा से जरांगे की अगली रवानगी और सरकार के साथ उनकी बातचीत पर टिकी हैं।