Mira-Bhayandar Police Commissioner Madhukar Pandey Transferred: भाषा विवाद को लेकर मनसे के विरोध मार्च के एक दिन बाद मीरा भयंदर-वसई विरार (MBVV) के पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे का तबादला कर दिया गया है।
मराठी बनाम हिंदी भाषा विवाद को लेकर राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद मीरा-भायंदर शहर के पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे का तबादला कर दिया गया है। फडणवीस सरकार ने दो महीने पहले ही पांडे को राज्य का 'सर्वश्रेष्ठ पुलिस आयुक्त' सम्मान से नवाजा था।
एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने मीरा भयंदर-वसई विरार (MBVV) के पुलिस आयुक्त मधुकर पांडे का तबादला कर दिया है। उनकी जगह निकेत कौशिक को एमबीवीवी (Mira Bhayandar-Vasai Virar) का नया पुलिस मुखिया बनाया गया है।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मधुकर पांडे को अब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद देवेंद्र फडणवीस द्वारा शुरू की गई 100 दिवसीय कार्ययोजना की प्रगति रिपोर्ट में पांडे को राज्य का “सर्वश्रेष्ठ पुलिस आयुक्त” चुना गया था।
मुंबई के करीब मीरा-भायंदर शहर में मनसे की विरोध रैली को लेकर मंगलवार को पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहा। रैली की अनुमति न मिलने के चलते पुलिस और मनसे कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। मनसे के ठाणे और पालघर जिलाध्यक्ष अविनाश जाधव सहित कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते रैली को मनसे द्वारा तय किए गए मार्ग से ही निकालने की मंजूरी दी गई।
इस दौरान, महिलाओं सहित कई मनसे कार्यकर्ताओं को पुलिस वैन और ऑटो रिक्शा में भरकर ले जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को शहर के अलग-अलग हिस्सों में नजरबंद कर रखा था ताकि वे रैली स्थल तक न पहुंच सकें।
मंगलवार को एमबीवीवी के पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे ने भाषा विवाद को लेकर मनसे के विरोध प्रदर्शन पर कहा था, "बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के आधार पर हमने कहा कि आप अनुमति ले सकते हैं लेकिन रूट बदल दें। हमारे पास कुछ खुफिया इनपुट भी थे, जिसके मद्देनजर हमने यह फैसला लिया।"
गौरतलब हो कि मनसे की यह रैली हाल ही में एक गैर-मराठी दुकानदार के मराठी न बोलने पर हुई मारपीट की घटना के विरोध में व्यापारियों द्वारा किए गए प्रदर्शन के जवाब में आयोजित की गई थी। इसी पृष्ठभूमि में मीरा-भायंदर पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मनसे को उनके निर्धारित रूट से रैली निकालने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, मनसे नेता और कार्यकर्ता अपनी मांग पर अड़े रहे और अंततः भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच यह रैली निकाली गई। इस पूरी घटनाक्रम के बाद अब मामला राजनीतिक रूप ले चुका है।