Maharashtra Rickshaw Marathi Mandatory: महाराष्ट्र में रिक्शा ड्राइवरों के लिए मराठी अनिवार्य होने के बाद नालासोपारा में मनसे ने स्टिकर अभियान चलाया। हिंदी भाषी ड्राइवर भी सीख रहे हैं मराठी।
Maharashtra Rickshaw Marathi Mandatory: महाराष्ट्र सरकार द्वारा सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में मराठी भाषा को प्राथमिकता देने के फैसले के बाद अब जमीन पर इसका असर दिखने लगा है। पालघर जिले के नालासोपारा में मनसे (MNS) ने एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसके तहत सैकड़ों रिक्शा पर मराठी गौरव से जुड़े स्टिकर लगाए गए हैं।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में घोषणा की थी कि 1 मई से रिक्शा और टैक्सी चालकों के लाइसेंस सत्यापन (Re-Verification) के दौरान उनकी मराठी बोलने की क्षमता की जांच की जाएगी। इस फैसले के बाद से ही प्रवासी ड्राइवरों के बीच हलचल तेज है और कई ड्राइवरों ने लाइसेंस रद्द होने के डर से मराठी सीखना शुरू कर दिया है।
मनसे ने नालासोपारा में इस अभियान को गति देने के लिए रिक्शा के सामने वाले हिस्से पर आकर्षक स्टिकर चिपकाए हैं। इन स्टिकर पर संदेश लिखा है कि 'मी मराठी बोलतो, मला मराठी समजते, माझ्या रिक्षात बसा' (मैं मराठी बोलता हूं, मैं मराठी समझता हूं, मेरी रिक्शा में बैठिए)। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसका उद्देश्य न केवल भाषा को बढ़ावा देना है, बल्कि मराठी भाषी ड्राइवरों को विशिष्ट पहचान और प्राथमिकता दिलाना भी है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल स्थानीय मराठी भाषी ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में हिंदी भाषी प्रवासी ड्राइवर भी शामिल हुए। कई प्रवासी चालकों ने अपनी रिक्शा पर खुशी-खुशी ये स्टिकर लगवाए और मराठी सीखने की इच्छा जताई। आयोजकों का मानना है कि यह पहल केवल भाषाई पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रवासियों को स्थानीय संस्कृति में ढालने और समावेशी बनाने की एक कोशिश है।
परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे मई महीने से कड़ाई से इस नियम का पालन सुनिश्चित करें। जो ड्राइवर मराठी बोलने में असमर्थ पाए जाएंगे, उनके लाइसेंस पर संकट आ सकता है। यही कारण है कि अब मुंबई और आसपास के इलाकों में ड्राइवरों के बीच 'मराठी लर्निंग' का नया दौर शुरू हो गया है।