
Supriya Sule News:महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय हलचल मची हुई है। नेताओं के इस दल से उस दल में जाने की अफवाहें इतनी तेज हैं कि अब खुद नेता भी इससे परेशान हो चुके हैं। इसी बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के कांग्रेस में विलय और सांसदों के टूटने की खबरों पर सांसद सुप्रिया सुले का गुस्सा फूट पड़ा है। लगातार उड़ रही अफवाहों से नाराज सुप्रिया सुले ने तंजिया लहजे में कहा कि अब तो हमें सिर्फ राज ठाकरे की पार्टी (MNS) में भेजना ही बाकी रह गया है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि शरद पवार की पार्टी के कई सांसद पाला बदल सकते हैं। इन चर्चाओं पर बीजेपी, शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर जब सुप्रिया सुले से एक कार्यक्रम के दौरान सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मजाकिया लेकिन तीखे अंदाज में अफवाह उड़ाने वालों की क्लास लगा दी।
सुप्रिया सुले ने कहा कि हमारा कुल 8 सांसदों का एक वॉट्सऐप ग्रुप है। रोज सुबह जब हम टीवी खोलते हैं, तो हमें किसी न किसी नई पार्टी में भेज दिया जाता है। हम खुद अपने ग्रुप पर इन खबरों का खूब मजे लेकर स्वागत करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कल ही मैंने अपने सांसद साथी भास्कर भगरे से मजाक में कहा कि देखिए, बाकी सभी पार्टियों में हमारा नाम आ चुका है, बस राज ठाकरे की 'मनसे' (MNS) ही बची है, वहां भी हमारा नाम डलवा ही दीजिए।
बात यहीं खत्म नहीं हुई, सुप्रिया सुले ने अफवाह बाजार पर तंज कसते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ दिया। उन्होंने गुस्से और मजाक के मिले-जुले लहजे में कहा कि अब हम सब सांसदों ने आपस में तय कर लिया है कि भारत की पार्टियों में बहुत हो गया, अब सीधे इंटरनेशनल लेवल पर चलते हैं। शरद पवार गुट के सभी 8 सांसद अब सीधे अमरीका जाएंगे और डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में काम करेंगे। देश में यही सब तो मजाक चल रहा है। सुप्रिया सुले ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनप्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं का इस तरह से मजाक उड़ाया जा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस में अपनी पार्टी के विलय की खबरों पर भी हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया। सुले ने साफ शब्दों में कहा कि हमारी पार्टी का कांग्रेस में विलय होने की खबरों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। न तो कांग्रेस की तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव आया है और न ही हमने ऐसा कुछ सोचा है। हमारे और कांग्रेस के पारिवारिक रिश्ते जरूर हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर हम महाविकास अघाड़ी (MVA) के मजबूत साथी हैं और आगे भी मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे।