महामंडल को छोडऩे को मजबूर हैं एमएसएफ जवान सीआईएसएफ की तर्ज पर बनाया गया है एमएसएफसरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में संभालते हैं सुरक्षा ड्यूटी
नागमणि पांडेय
मुंबई। महाराष्ट्र सिक्युरिटी फोर्स (एमएसएफ) का गठन तकरीबन दशक भर पहले सीआईएसएफ की तर्ज पर महाराष्ट्र राज्य सुरक्षा महामंडल द्वारा किया गया। महामंडल ने 150 से 200 जवानों को लेकर एमएसएफ शुरू किया था। एमएसएफ को सीआईएसएफ की तरह लगभग सभी अधिकार हासिल हैं। लेकिन, जवानों के वेतन व अन्य सुविधाओं में काफी अंतर है। इसे लेकर मेहनतकश एमएसएफ जवानों में नाराजगी साफ देखी जा सकती है।
महाराष्ट्र राज्य सुरक्षा महामंडल (एमएसएससी) ने एमएसएफ का गठन शिक्षित और योग्य युवाओं को रोजगार मुहैया करने के लिए किया है। नौ साल पहले 2010 में महामंडल द्वारा एमएसएफ का गठन किया गया। इसके बाद महामंडल ने राज्य के विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में एमएसएफ के जवानों को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया जाने लगा। एमएसएफ में बहाली के लिए जवानों को कड़े प्रशिक्षण और इम्तहान से गुजरना पड़ता है। फिलहाल एमएसएफ में 12 से 14 जवान हैं।
कई जवानों ने छोड़ी नौकरी
मिली जानकारी अनुसार महामंडल ने कुछ जवानों को अलग-अलग कारणों से नौकरी से निकाल दिया है। साथ ही बड़ी संख्या में एमएसएफ जवानों ने खुद ही नौकरी छोड़ी है। इसकी वजह जायज मांग की लगातार अनदेखी बताई जा रही है।
वेतन-सुविधाओं में अंतर
नौकरी छोड़ चुके एक जवान ने बताया कि सीआईएसएफ के समान हम काम करते हैं, लेकिन सुविधाएं और वेतन उनके जैसा नहीं मिलता है। सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में और जवान भी नौकरी छोड़ सकते हैं। कई लोगों ने सीआईएसएफ में इंटरव्यू भी दिया है।