
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को लेकर बड़ी अपडेट (Photo: IANS/File)
देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे को गति देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से देरी का सामना कर रहे एक्सप्रेसवे के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए NHAI ने नया टेंडर जारी किया है। यह टेंडर गुजरात के वलसाड जिले में स्थित पैकेज-9 (करवाड़ से जूजुवा) के अधूरे निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए निकाला गया है।
एनएचएआई द्वारा जारी टेंडर के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 873.62 करोड़ रुपये है। यह काम इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत कराया जाएगा। यह हिस्सा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे में भी आता है।
यह पैकेज मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के किमी 128 से किमी 154.6 के बीच स्थित लगभग 26 किमी लंबे सेक्शन से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, चयनित कंपनी को काम शुरू होने की तारीख से 18 महीने यानी डेढ़ साल के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा।
इसके अलावा ठेकेदार को निर्माण पूरा होने के बाद अगले 10 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। टेंडर कार्यक्रम के अनुसार इस परियोजना के लिए प्राप्त बोलियां 15 जुलाई 2026 को खोली जाएंगी। इसके बाद ठेकेदार का चयन कर निर्माण कार्य को दोबारा गति दी जाएगी।
पैकेज-9 उन तीन प्रमुख हिस्सों में शामिल है, जिनकी वजह से मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई थी। यह हिस्सा पैकेज-8 (जूजुवा-गांदेवा) और पैकेज-10 (तलसारी-करवाड़) के साथ मिलकर लगभग 87 किमी लंबे कॉरिडोर का हिस्सा है।
इन तीनों पैकेजों का निर्माण कार्य पहले पुणे स्थित रोडवे सॉल्यूशंस इंडिया इंफ्रा लिमिटेड (RSIIL) को सौंपा गया था। हालांकि, निर्माण की धीमी गति के कारण परियोजना निर्धारित समयसीमा से पीछे चली गई।
एनएचएआई ने इसी साल जनवरी में देरी के चलते पैकेज-8 का आरएसआईआईएल से जुड़ा अनुबंध रद्द कर नया टेंडर जारी किया था। अब लगातार धीमी प्रगति को देखते हुए प्राधिकरण ने पैकेज-9 का अनुबंध भी समाप्त कर दिया है और अधूरे कार्य के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे भारत की सबसे महत्वपूर्ण हाईवे परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। यह एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे गुजरात और महाराष्ट्र के बीच सड़क संपर्क को और मजबूत करेगा।
परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और गुजरात के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में काफी कमी आएगी। साथ ही माल परिवहन तेज होगा, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और पश्चिमी भारत के औद्योगिक तथा आर्थिक गलियारों को नई गति मिलेगी।
Updated on:
29 May 2026 07:18 pm
Published on:
29 May 2026 07:18 pm
