
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
पुणे. एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि देश की हालत बहुत ही खराब है, केंद्र सरकार जानबूझकर लोगों का ध्यान गंभीर समस्याओं से हटाने का प्रयास कर रही है। सरकार देश में नागरिकता संशोधन बिल लाकर जान-बूझकर अस्थिरता पैदा कर रही है।
शरद ने कहा कि सरकार ने सिर्फ तीन देशों के बारे में ही विचार किया, अन्य देशों के बारे में क्यों नहीं सोचा गया? देश की अर्थव्यवस्था संकट में है, इसे छुपाने के लिए यह सरकार का षड्यंत्र है। देश आर्थिक संकट की चपेट में फंसा है, इस ओर लोगों का ध्यान न जाए यह सरकार चाहती है। आठ राज्यों ने नागरिक संशोधन बिल को लागू करने से मना कर दिया है। नागरिक संशोधन बिल की वजह से देश की सामाजिक-धार्मिक एकता में बिखराव होने की आशंका है। पांच वर्षों में राज्य की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी। कैग की ओर से पेश की गई रिपोर्ट गंभीर है। सरकार जांच कर उसकी वास्तविकता जनता के सामने रखे।
पवार ने कहा कि एल्गार परिषद में शामिल हुए सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यिकारों को जेल में बंद करना गलत है। एल्गार परिषद में शामिल होने पर गिरफ्तार करने वालों के मूलभूत अधिकारों का हनन है। नामदेव ढसाल की कविता की पंक्ति पढऩे के कारण जेल में डालना सत्ता का दुरुपयोग है। परिषद ने में जिन्होंने गाना गाया उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सरकार के कार्यो पर टिका-टिप्पणी करने पर राष्ट्रद्रोही ठहराना उचित नहीं है। सुरेंद्र गडलिंग दलित समाज के लिए काम करते हैं। सुधीर ढवले भी वंचितकों के लिए कार्य करते हैं। सुधा भारद्वाज ने आदिवासी समाज के लिए काम किया है। ऐसा लगता है पूना पुलिस आयुक्त और उनके कुछ सहयोगियों ने बदलें की भावना से काम किया है। इसलिए इस मामले की जांच एसआईटी से कराने की जरूरत है। इन अधिकारियों को निलंबित कर जांच की जाए। यह मांग हम राज्य सरकार से करेंगे। कोरेगाव भीमा हिंसा मामले में की गई कार्रवाई भी बदलें की भावना से प्रेरित लगती है।