
Mumbai Lake Water Levels: मुंबई में पानी की सप्लाई करने वाली सात प्रमुख झीलों में पानी का स्तर तेजी से घटने लगा है। आज (6 अक्टूबर) सुबह तक के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के सात जलाशयों में कुल 94.91 प्रतिशत पानी बचा है। पिछले दो वर्षों में इसी तारीख को जल भंडार 99 प्रतिशत से अधिक था। यानी इस साल उपलब्ध पानी पिछले दो वर्षों की तुलना में करीब 4 प्रतिशत कम है।
मुंबई के सात जलाशयों में मोडक सागर की स्थिति सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है। यहां पानी का स्टॉक करीब 72 प्रतिशत रह गया है। कुछ दिन पहले भी यह लगातार नीचे जा रहा था। 4 अक्टूबर को मोडक सागर में पानी 75.19 प्रतिशत था, जो 6 अक्टूबर तक करीब 72 प्रतिशत रह गया।
मोडक सागर के अलावा तानसा और भातसा जैसे महत्वपूर्ण जलाशयों में भी पानी के स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित विहार लेक अभी 100 प्रतिशत भरी हुई है।
मुंबई नगर निगम (BMC) के अनुसार, 6 अक्टूबर की सुबह मुंबई के सातों जलाशयों में कुल 13,73,710 मिलियन लीटर पानी दर्ज किया गया। इन जलाशयों की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 14,47,363 मिलियन लीटर है।
तुलना करें तो 6 अक्टूबर 2025 को जलाशयों में पानी का स्टॉक 99.21 प्रतिशत और 2024 में 99.11 प्रतिशत था। इस लिहाज से इस साल मुंबई के जलाशयों में पिछले दो वर्षों की तुलना में करीब 60 हजार मिलियन लीटर पानी कम है।
मुंबई को सबसे ज्यादा पानी उपलब्ध कराने वाले भातसा जलाशय में भी गिरावट देखी जा रही है। यह जलाशय मानसून के दौरान 100 प्रतिशत तक भर गया था, लेकिन अब इसका जलस्तर नीचे आया है। 6 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार भातसा में करीब 97.36 प्रतिशत पानी बचा है।
वहीं मध्य वैतरणा में करीब 99.7 प्रतिशत, अपर वैतरणा में 96.6 प्रतिशत, तानसा में 93.02 प्रतिशत और तुलसी में 97.61 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है। विहार झील 100 प्रतिशत भरी हुई है।
इस साल जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश हुई, लेकिन मानसून के बाद तापमान बढ़ने और बारिश रुकने के साथ जलाशयों में पानी कम होने लगा है। BMC ने भी पहले चेतावनी दी थी कि अक्टूबर और नवंबर में तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण बढ़ सकता है और पानी का भंडार तेजी से कम हो सकता है।
मुंबई के लिए यह आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शहर की जलापूर्ति इन्हीं सात जलाशयों पर निर्भर है। मौजूदा स्थिति में तत्काल पानी की कमी तो नहीं है, लेकिन मानसून खत्म होने के बाद अब लगातार घटता जलस्तर आने वाले महीनों में चिंता खड़ी कर सकता है।