Mumbai Western Railway FRS: मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर लगाया गया फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) अब अपराधियों, संदिग्धों और लापता लोगों को ढूंढने में गेमचेंजर साबित हो रहा है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अपराध पर लगाम कसने के लिए अब तकनीक सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है। पश्चिमी रेलवे (वेस्टर्न रेलवे) का अत्याधुनिक 'फेस रिकग्निशन सिस्टम' (FRS) न केवल रेलवे बल्कि देशभर की जांच एजेंसियों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो रहा है। अब तक कई हाई-प्रोफाइल मामलों में इसी तकनीक की मदद से पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।
हाल ही में महिला पुर्तगाली पर्यटक से छेड़छाड़ करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी हो या अभिनेता सैफ अली खान पर हमले के संदिग्ध की तलाश, इस तकनीक ने जटिल मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के मुंबई डिवीजन में लगे 3,675 सीसीटीवी कैमरों में से 463 कैमरे इस स्मार्ट तकनीक से लैस हैं, जो चर्चगेट से लेकर सूरत और जलगांव तक फैले 114 स्टेशनों पर हर पल नजर रखते हैं।
फेस रिकग्निशन सिस्टम व्यक्ति के चेहरे के अलग-अलग हिस्सों जैसे आंखों के बीच की दूरी, माथा, नाक, कान और गालों की हड्डियों की बनावट को डेटा में बदलकर एक यूनिक 'फेसप्रिंट' तैयार करता है। जब भी कोई संदिग्ध या वॉचलिस्ट में शामिल व्यक्ति इन कैमरों की जद में आता है, सॉफ्टवेयर तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
साल 2024 में ही एनआईए (NIA) और सीबीआई (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ट्रैक किए जा रहे 10,000 से अधिक संदिग्धों की तस्वीरें इस सिस्टम में अपलोड की गई हैं। यह सिस्टम धुंधली फुटेज में भी संभावित मिलान ढूंढने में सक्षम है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह व्यक्ति की गतिविधियों के पैटर्न को समझता है। जैसे इसी साल जनवरी में मुंबई के मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर आलोक सिंह पर हमला करने वाले आरोपी ओमकार शिंदे को इसी सिस्टम की मदद से पकड़ा गया। दरअसल फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से पता चला कि वह रोज एक तय समय पर ट्रेन पकड़ता था और शाम को एक ही रूट से लौटता था। इसी पैटर्न के आधार पर पुलिस ने उसे दबोच लिया।
सिर्फ अपराध ही नहीं, यह सिस्टम अपनों से बिछड़े हुए बच्चों को मिलाने में भी अहम भूमिका निभाता है। देशभर की पुलिस लापता बच्चों की तस्वीरें लेकर मुंबई आरपीएफ के पास आती है। अक्सर भीड़भाड़ वाले चर्चगेट या सीएसएमटी आदि स्टेशनों पर यह सिस्टम लापता बच्चों को ट्रैक करने में सफल होता है। हाल ही में मुंबई के गोरेगांव से लापता 14 वर्षीय बच्चे को राजस्थान से बरामद किया गया।
गौरतलब हो कि पश्चिमी रेलवे देश का पहला ऐसा रेल डिवीजन है जिसने सीसीटीवी के साथ एफआरएस को सफलतापूर्वक जोड़ा है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए वे भविष्य में भी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग जारी रखेंगे।
एफआरएस की कामयाबी को देखते हुए अब मध्य रेलवे के मुंबई सेक्शन में भी इसे लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, मुंबई पुलिस भी अपने 5,000 कैमरों के नेटवर्क को इस तकनीक से जोड़ने की प्रक्रिया में है।