उनके मुताबिक अगर, बच्चों को सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सीखने का समय दिया जाए, तो उनमें आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती अपने-आप विकसित हो जाती है। यही वजह है कि वो माता-पिता और शिक्षकों से आग्रह करती हैं कि वो बच्चों पर लेबल लगाने की बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें।