मुंबई

LPG हादसे के 10 साल बाद नागपुर परिवार को मिला इंसाफ, कोर्ट ने 7 लाख रुपए मुआवजा देने का दिया आदेश

LPG Accident Compensation: नागपुर के एक परिवार को 10 साल पुराने एलपीजी हादसे में आखिरकार न्याय मिला है। जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित 7 लाख रुपए मुआवजा देने और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को पीड़ित परिवार को 60 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
2 min read
Jul 07, 2026
LPG Accident Compensation
कोर्ट ने 7 लाख रुपए मुआवजा देने का दिया आदेश

Nagpur LPG Accident:महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाले एक पीड़ित परिवार को पूरे एक दशक (10 साल) के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इंसाफ मिल गया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को पीड़ित व्यक्ति को ब्याज सहित 7 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को भी उपभोक्ता के परिवार को 60,000 रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

नागपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने यह राहत साहेबराव कटारे को दी है, जिनकी पत्नी देवरत्ना कटारे की साल 2015 में गैस सिलेंडर लीक होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

3 महीने तक जिंदगी से जंग हार गई थी पत्नी

यह दर्दनाक हादसा 23 दिसंबर 2014 को हुआ था, जब देवरत्ना रसोई में रात का खाना बना रही थीं। उसी दौरान गैस सिलेंडर बदलते समय अचानक लीक हुआ और रसोई में जल रहे पूजा के दीये की वजह से गैस ने आग पकड़ ली, जिससे जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में देवरत्ना 54 फीसदी तक झुलस गई थीं। अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश में पति साहेबराव भी 12 फीसदी तक झुलस गए थे। अस्पताल में करीब 3 महीने तक चले लंबे इलाज के बाद, 3 मार्च 2015 को देवरत्ना ने दम तोड़ दिया था। इस हादसे और इलाज में परिवार के करीब 6 लाख रुपए खर्च हो गए थे और घर का सारा सामान भी जलकर खाक हो गया था।

कोर्ट ने किसे कितनी राशि देने का दिया आदेश?

पीड़ित साहेबराव ने उपभोक्ता फोरम को बताया था कि नीति (पॉलिसी) के अनुसार वे 20 लाख रुपये के मुआवजे के हकदार थे। मामले की पूरी सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने स्थानीय गैस वितरक (डीस्ट्रिब्यूटर) को किसी भी सेवा में कमी या लापरवाही के आरोप से बरी कर दिया। कोर्ट ने 'पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी फॉर ऑयल इंडस्ट्रीज' के तहत मुआवजे का निर्धारण इस प्रकार किया।

बीमा कंपनी को आदेश

आकस्मिक मृत्यु के लिए 5 लाख रुपए, पति की चोटों के इलाज के लिए 1 लाख रुपये और संपत्ति के नुकसान के एवज में 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया। परिवार को हुए लंबे मानसिक उत्पीड़न और तनाव के लिए 50,000 रुपये और कानूनी खर्च (कोर्ट फीस) के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत ने यह पूरी राशि (कुल 7 लाख 60 हजार रुपये) 45 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को सौंपने का अल्टीमेटम दिया है।

क्यों हुई फैसले में 10 साल की देरी?

साहेबराव ने आरोप लगाया था कि हादसे के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस से भी गुहार लगाई थी, लेकिन जांच में कोई प्रगति नहीं हुई। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान बीपीसीएल के स्थानीय वितरक ने दावा किया था कि धमाका गैस बर्नर का नॉब खुला रहने की वजह से हुआ था, उनकी तरफ से कोई लापरवाही नहीं थी। वहीं यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने भी यह कहकर याचिका का विरोध किया था कि परिवार ने जरूरी दस्तावेज जमा करने में काफी देरी की।

Updated on:
07 Jul 2026 05:57 pm
Published on:
07 Jul 2026 05:57 pm