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Maharashtra News: नागपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, एक हजार से ज्यादा वाहनों के पास नहीं है फिटनेस सर्टिफिकेट

महाराष्ट्र के नागपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। सुरक्षा को लेकर स्कूली वाहनों द्वारा अनदेखी की जा रही है। बता दें कि जिले के एक हजार से अधिक स्कूली वाहनों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है।
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Sep 27, 2022
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School Bus

महाराष्ट्र के नागपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूली बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी की वजह से तीनों क्षेत्रीय परिवहन ऑफिसों के अलावा नागपुर शहर और जिला पुलिस की कार्यप्रणाली भी अब सवालों के घेरे में आ गई है। राज्य परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, नागपुर में स्कूली बसों और वैन समेत कम से कम 39 प्रतिशत वाहनों के पास जरूरी फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं है।

नागपुर शहर और ग्रामीण दोनों इलाकों समेत नागपुर जिले में स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने के लिए परिवहन विभाग में करीब 3 हजार 464 वैन और बसें पंजीकृत हैं। इनमें से 1 हजार 348 वाहनों के पास जरूरी फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं हैं। यह भी पढ़ें: Mumbai News: मुंबई को मिला पहला अनोखा रिसर्च सेंटर, यहां किया जाएगा लोगों की खुशी पर रिसर्च

बता दें कि नियम के मुताबिक, एक गाड़ी में 10 से ज्यादा स्टूडेंट्स (यदि वे 12 साल से कम उम्र के हैं) नहीं ले जा सकते हैं, जबकि ऑटो में अधिकतम पांच स्टूडेंट्स ही होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में इसी तरह के आदेश जारी किए थे। लेकिन आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस दोनों की आलस्य की वजह से इन नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ऐसे निजी वाहन, कार और यहां तक कि हजारों की संख्या में ऑटो भी हैं जो पंजीकृत नहीं हैं और वे बच्चों को स्कूलों से घर वापस ले जाती हैं। उनमें से ज्यादातर में स्कूली बच्चे क्षमता से अधिक भरे होते हैं। परिवहन विभाग, जो बच्चों की स्कूल बसों में यात्रा सुनिश्चित करता है, इस गंभीर मुद्दे पर अनदेखा कर रहा है। हालांकि क्षेत्रीय परिवहन विभाग के पूर्वी, शहरी और ग्रामीण कार्यालयों में बच्चों को ले जाने वाली बसों और वैन के आंकड़े हैं, लेकिन नागपुर शहर के स्कूलों में स्टूडेंट्स को ले जाने वाले ऑटो की संख्या के बारे में कोई डेटा मौजूद नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह संख्या 8,000 से 10,000 के बीच हो सकती है।

इस मामले में पिछले महीने पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने फिटनेस सर्टिफिकेट मानदंडों का पालन करने के लिए बसों और वाहनों के लिए 15 सितंबर की समय सीमा तय की थी। समय सीमा से एक वीक पहले, न तो शहर की पुलिस और न ही परिवहन विभाग ने वाहनों में स्कूली बच्चों को ले जाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। हालांकि डिप्टी आरटीओ रवींद्र भुयार ने उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि किसी को भी माफ नहीं किया जाएगा।

Updated on:
27 Sept 2022 06:44 pm
Published on:
27 Sept 2022 06:44 pm