मुंबई

‘नाना कुछ चीजों में समझौता कर लेते तो क्या दूसरे कलाकारों को मौका मिलता?’ राज ठाकरे ने जताया अफसोस

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर के निधन पर राज ठाकरे ने भावुक पोस्ट लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नाना के अभिनय, बेबाक व्यक्तित्व और आम आदमी की भावनाओं को पर्दे पर उतारने की क्षमता को याद किया और कहा कि उनके स्वभाव के कारण फिल्म इंडस्ट्री को भी नुकसान हुआ।
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Oct 08, 2026
Nana Patekar Death
नाना के निधन को लेकर राज ठाकरे ने जताया अफसोस, फोटो सोर्स- ANI

Raj Thackeray on Nana Patekar: अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से मराठी और हिंदी फिल्म जगत में शोक की लहर है। 75 साल के नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में निधन हो गया। उनके निधन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक लंबी और भावुक पोस्ट लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राज ठाकरे ने नाना पाटेकर के अभिनय, उनके व्यक्तित्व और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया।

‘सामान्य आदमी की भावनाओं को पर्दे पर उतारते थे नाना’

राज ठाकरे ने लिखा कि मुंबई और हिंदी सिनेमा का रिश्ता बेहद गहरा रहा है और इस पूरे सफर में नाना पाटेकर अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए समाज की कई तस्वीरें पर्दे पर लेकर आए। ‘हमीदाबाई की कोठी’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नाना ने आम आदमी के भीतर चल रहे गुस्से, बेचैनी, अपमान, निराशा और संघर्ष को अपने अभिनय के जरिए आवाज दी।

‘नाना के अभिनय में गुस्सा और गहरा नैराश्य दिखता था’

राज ठाकरे ने नाना पाटेकर के अभिनय की तुलना हॉलीवुड अभिनेता मॉर्गन फ्रीमैन से भी की। उन्होंने कहा कि दोनों कलाकार पारंपरिक मायनों में उस दौर के स्थापित फिल्मी चेहरे की छवि में फिट नहीं बैठते थे। हालांकि, राज ठाकरे के मुताबिक जहां फ्रीमैन के अभिनय में अनुभव और धैर्य दिखाई देता था, वहीं नाना के अभिनय में गुस्सा, बेचैनी और भीतर तक जमा निराशा महसूस होती थी। उन्होंने कहा कि नाना इसी भावनात्मक तीव्रता को पर्दे पर बेहद प्रभावी तरीके से पेश करने में सक्षम थे।

‘चरित्र अभिनेताओं के लिए रास्ता नाना ने बनाया’

राज ठाकरे ने कहा कि 2000 के दशक में जब फिल्मों में केवल पारंपरिक रूप-रंग वाले नायकों के बजाय कहानी और उसे प्रभावी ढंग से पेश करने वाले कलाकारों को महत्व मिलने लगा, तब नाना पाटेकर इस बदलाव के प्रमुख चेहरों में थे। उन्होंने कहा कि आज चरित्र अभिनेताओं को जिस तरह फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिल रही हैं, उसके लिए नाना ने एक रास्ता तैयार किया।

‘नाना कुछ चीजें एडजस्ट कर लेते तो…’

राज ठाकरे ने नाना पाटेकर के स्वभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नाना मनमौजी और बेबाक थे तथा मन में आने वाली बात कह देते थे। राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या उनके इसी स्वभाव के कारण कुछ निर्माता और निर्देशक उन्हें फिल्मों में लेने से बचते थे। उन्होंने कहा कि इससे नाना का कितना नुकसान हुआ, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि वह खुद बेफिक्र स्वभाव के थे, लेकिन उनके मुताबिक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों का जरूर नुकसान हुआ।

राज ठाकरे ने आगे लिखा कि अगर नाना ने कुछ चीजों में समझौता किया होता, तो क्या नवाजुद्दीन सिद्दीकी और इरफान खान जैसे कलाकारों को वही अवसर मिलते, इस पर भी उनके मन में सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि नाना ने केवल गंभीर और आक्रामक भूमिकाएं ही नहीं निभाईं, बल्कि ‘वेलकम’ जैसी फिल्म में अपनी कॉमेडी से भी साबित किया कि वह हास्य भूमिकाओं को भी उतनी ही मजबूती से निभा सकते हैं।

‘नाना गए, लेकिन उनका पर्दे पर बनाया आम आदमी हमारे बीच है’

राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि नाना पाटेकर के निधन के बाद भी उन्होंने पर्दे पर जिस आम आदमी को जीवंत किया, उसकी भावनाएं समाज में आज भी मौजूद हैं। उनके मुताबिक उस आम आदमी का गुस्सा, बेचैनी, अपमान, संघर्ष और परिस्थितियों से लड़ने की ताकत आज भी हमारे आसपास दिखाई देती है। राज ठाकरे ने कहा कि नाना को विदाई देना केवल एक बड़े अभिनेता को विदाई देना नहीं है, बल्कि आम आदमी के भीतर जमा अनगिनत भावनाओं के एक चेहरे के चले जाने जैसा है।

Updated on:
08 Oct 2026 12:25 pm
Published on:
08 Oct 2026 12:25 pm