
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी फिल्म जगत में शोक की लहर है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। उन्हें बचाने के लिए डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया था। पुलिस ने उनके निधन के मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही उनके चाहने वालों, फिल्मी दुनिया और राजनीतिक क्षेत्र से श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने नाना को याद करते हुए कहा कि उनके जैसा अभिनेता अब शायद ही कभी देखने को मिलेगा। उन्होंने नाना को एक संवेदनशील, स्पष्टवादी और बेहतरीन इंसान बताया।
संजय राउत ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने बॉलीवुड में मराठी व्यक्ति के स्वाभिमान और अस्मिता को मजबूती से कायम रखा। नाना ने अपने अभिनय और व्यक्तित्व से यह दिखाया कि मराठी व्यक्ति अपने सम्मान और पहचान को लेकर कितना संवेदनशील हो सकता है।
राउत ने कहा कि नाना का हिंदी सिनेमा में भी एक अलग तरह का प्रभाव था। वह सिर्फ अभिनेता नहीं थे, बल्कि साहित्य और कविता की गहरी समझ रखने वाले संवेदनशील कलाकार थे। उनके जाने से एक ऐसा कलाकार चला गया है जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस होगी।
संजय राउत ने नाना पाटेकर और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच बेहद गहरे संबंध थे। नाना खुद को उस समय शिवसैनिक मानते थे और मराठी मानुष से जुड़े आंदोलनों को भी समर्थन देते थे।
राउत के मुताबिक, नाना का राजनीतिक क्षेत्र में भी सभी दलों के नेताओं के साथ संपर्क था। हालांकि, वह किसी बात से सहमत या असहमत होने पर अपनी राय खुलकर रखने के लिए जाने जाते थे। वह कई बार राजनीतिक मंचों से नेताओं को खरी-खरी भी सुनाते थे।
संजय राउत ने नाना पाटेकर और बालासाहेब ठाकरे से जुड़ा एक पुराना किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार बालासाहेब ठाकरे ने प्रख्यात साहित्यकार पु. ल. देशपांडे पर टिप्पणी की थी। नाना ने इस पर अपनी असहमति व्यक्त की थी, जिससे बालासाहेब नाराज हो गए थे।
इसके बाद नाना अगले दिन मातोश्री पहुंचे और बालासाहेब के सामने बैठ गए। राउत के अनुसार, उस समय बालासाहेब ने नाना पाटेकर को डांट लगाई थी। तो नाना ने बड़ी सादगी और सम्मान से कहा, "आप हमारे पिता समान हैं, आपको मुझ पर गुस्सा होने और डांटने का पूरा अधिकार है।" राउत ने कहा कि नाना बालासाहेब को अपना मार्गदर्शक और पिता समान मानते थे।
संजय राउत ने नाना पाटेकर के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वह बाहर से भले ही कठोर दिखाई देते थे, लेकिन अंदर से बेहद भावुक और संवेदनशील इंसान थे। वह किसी के दुश्मन नहीं थे और उनके व्यक्तित्व में एक अलग तरह की बेबाकी थी।
उन्होंने कहा कि नाना उन कलाकारों में नहीं थे जो विवाद के डर से चुप रह जाएं। जो बात उन्हें सही लगती थी, उसके समर्थन में बोलते थे और जो गलत लगता था, उसका खुलकर विरोध करते थे। उनके स्पष्टवादी स्वभाव ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दी।
नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक के अपने करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
नाना को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के साथ पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। अभिनय के अलावा वह सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे और किसानों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करते थे। उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "नाना पाटेकर एक बेहतरीन कलाकार थे जिन्होंने अलग-अलग किरदारों के माध्यम से दर्शकों का दिल जीता। नाना पाटेकर जी का जीवन तिरंगे की आन बान और शान के लिए समर्पित रहा। वह बंधनों में नहीं रहे, परिंदे की तरह फिल्मों के आसमान में उड़े। उन्होंने समाज में व्याप्त व्यवस्था पर अपनी फिल्मों के माध्यम से करारा प्रहार किया। एक ऐसे क्रांतिवीर थे जिन्होंने बुराइयों के विरुद्ध काम किया। उनकी वाणी जितनी तेज थी, उनकी खामोशी भी उतनी ही प्रभावी थी। वह देश विरोधियों पर निरंतर अंकुश के समर्थक थे। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवार जनों और चाहने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।"