
Narendra Dabholkar Case Verdict: महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एएनएस) के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर (Narendra Dabholkar Case) की हत्या के मामले में मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सचिन अंदुरे को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने अंदुरे को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर भी रोक लगा दी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने यह आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद दाभोलकर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सचिन अंदुरे को राहत मिली है। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में दावा किया था कि सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर ने ही दाभोलकर को गोली मारी थी।
बता दें कि पुणे की एक अदालत ने 10 मई 2024 को इस मामले में सजा सुनाया था। तब अदालत ने सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जबकि तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
सीबीआई ने जून 2016 में हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था से जुड़े डॉ. वीरेंद्र तावड़े को गिरफ्तार किया था। तावड़े को इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। लेकिन सुनवाई के बाद वीरेंद्र तावड़े सहित विक्रम भावे और संजीव पुनालेकर को बरी कर दिया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 20 गवाहों और बचाव पक्ष ने दो गवाहों से सवाल-जवाब किए।
मालूम हो कि अंधविश्वास और अतार्किक धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले संगठन महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एएनएस) की स्थापना नरेंद्र दाभोलकर ने की थी। दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में ओंकारेश्वर पुल के करीब गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह सुबह की सैर पर निकले थे।
पुणे में दाभोलकर की हत्या के बाद फरवरी 2015 में गोविंद पानसरे (Govind Pansare) और उसी साल अगस्त में कोल्हापुर में एमएम कलबुर्गी (MM Kalburgi) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि गौरी लंकेश (Gauri Lankesh) की सितंबर 2017 में बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इन सभी मामलों में दक्षिणपंथी समूहों पर आरोप लगाये गए हैं।