
Narendra Dabholkar Case Verdict : अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड (Narendra Dabholkar Case) मामले में पुणे की अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। अदालत ने दाभोलकर की हत्या में शामिल दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि मामले में तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है।
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने आज तर्कवादी दाभोलकर की हत्या के मामले में सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि इस मामले में आरोपी डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और संजीव पुनालेकर को बरी कर दिया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 20 गवाहों और बचाव पक्ष ने दो गवाहों से सवाल-जवाब किए।
सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर और फिर दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच की कमान पुणे पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी थी। तब से हाईकोर्ट इस मामले की जांच की प्रगति की निगरानी कर रहा था। जांच पूरी कर सीबीआई ने पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
सीबीआई ने जून 2016 में हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था से जुड़े डॉ. वीरेंद्र तावड़े को गिरफ्तार किया था। तावड़े को इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में दावा किया कि सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर ने दाभोलकर को गोली मारी थी।
मालूम हो कि अंधविश्वास और अतार्किक धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले संगठन महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एएनएस) की स्थापना नरेंद्र दाभोलकर ने की थी। दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में ओंकारेश्वर पुल के करीब गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह सुबह की सैर पर निकले थे।
पुणे में दाभोलकर की हत्या के बाद फरवरी 2015 में गोविंद पानसरे (Govind Pansare) और उसी साल अगस्त में कोल्हापुर में एमएम कलबुर्गी (MM Kalburgi) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि गौरी लंकेश (Gauri Lankesh) की सितंबर 2017 में बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
Updated on:
10 May 2024 12:27 pm
Published on:
10 May 2024 12:03 pm
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