
अमिताभ बच्चन (फोटो सोर्स- Instagram/sonytvofficial)
Amitabh Bachchan On Struggle Days: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन आज हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शुमार हैं। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में अमिताभ बच्चन को कई बार रिजेक्शन और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कभी उनकी लंबी हाइट को लेकर सवाल उठे तो कभी उनकी आवाज और अभिनय को लेकर उन्हें सुनना पड़ा।
हाल ही में अमिताभ बच्चन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें किस तरह की बातें सुननी पड़ती थीं। उन्होंने यह भी बताया कि काम मिलने के बाद भी उन्हें लगातार अपनी कमियों पर डांट और सलाह मिलती रही, जिसने धीरे-धीरे उन्हें बेहतर अभिनेता बनने में मदद की।
केबीसी के एक एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने बताया कि जब वो इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें कई तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें यह तक कहा जाता था कि उन्हें अभिनय नहीं आता और उनकी लंबाई अभिनेता बनने के लिए ठीक नहीं है। अमिताभ ने अपने अंदाज में बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें काफी डांट पड़ती थी। लोग उनसे कहते थे कि उन्हें एक्टिंग के बारे में कुछ नहीं आता और वह बहुत लंबे हैं, इसलिए घर वापस चले जाएं।
हालांकि, अमिताभ ने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। जब उन्हें काम मिलना शुरू हुआ, तब भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। सेट पर उनके संवाद बोलने के तरीके और अभिनय को लेकर उन्हें लगातार टोका जाता था। वह इन आलोचनाओं को सीखने के तौर पर लेते रहे और समय के साथ अपने अभिनय में सुधार करते गए।
अमिताभ बच्चन के संघर्ष के किस्से को जानकर फैंस भी काफी इमोशनल नजर आए। बिग बी के कई फैंस ने उनके इस खुलासे के बाद अमिताभ की जमकर तारीफ की है।
अमिताभ बच्चन ने अपने संघर्ष के दिनों की एक और घटना साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार वह शूटिंग पर देर से पहुंचे थे। उस समय उनके पास अपनी कार भी नहीं थी और वह किसी दूसरे की कार से शूटिंग के लिए पहुंचे थे।
जब वह सेट पर पहुंचे तो शूटिंग खत्म हो चुकी थी। निर्देशक बाहर खड़े थे और उन्होंने अमिताभ को वहां से चले जाने के लिए कह दिया। उस वक्त यह घटना उनके लिए मुश्किल रही होगी, लेकिन बाद के वर्षों में यही संघर्ष उनकी यात्रा का हिस्सा बन गया।
अभिनय में आने से पहले अमिताभ बच्चन ने रेडियो में न्यूजरीडर बनने की कोशिश भी की थी। हालांकि, वहां भी उन्हें सफलता नहीं मिली। उनकी आवाज को इस काम के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। विडंबना यह है कि जिस आवाज को कभी रेडियो के लिए खारिज कर दिया गया था, वही आगे चलकर अमिताभ बच्चन की पहचान बन गई।
अमिताभ बच्चन ने 1969 में फिल्म ‘साथ हिंदुस्तानी’ से अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती फिल्में उन्हें वह पहचान नहीं दिला सकीं जिसकी उन्हें तलाश थी। लेकिन इसके बाद ‘जंजीर’ ने उनके करियर को नई दिशा दी और वह हिंदी सिनेमा के ‘एंग्री यंग मैन’ के तौर पर मशहूर हो गए।
इसके बाद ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’ और ‘अग्निपथ’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। आगे चलकर उन्होंने ‘मोहब्बतें’, ‘ब्लैक’, ‘पा’, ‘पीकू’, ‘पिंक’, ‘102 नॉट आउट’ और ‘झुंड’ जैसी फिल्मों में भी अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
आज अमिताभ बच्चन की वही लंबाई, आवाज और अभिनय उनकी पहचान का हिस्सा हैं, जिन पर कभी सवाल उठाए जाते थे। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि शुरुआती रिजेक्शन और आलोचना किसी के सफर का अंत नहीं, बल्कि सही तरीके से लिया जाए तो सफलता की शुरुआत भी बन सकती है।
Updated on:
18 Aug 2026 01:50 pm
Published on:
18 Aug 2026 01:50 pm
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