
NCP Maharashtra Leadership: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में संगठन नए सिरे से अपनी दिशा तय कर रहा है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को हटाने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि अजित पवार के निधन के बाद संगठन में सत्ता का नया संतुलन बनाते समय एक और आंतरिक विवाद खड़ा हो।
दरअसल, पिछले कुछ समय से एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज थी। सुनेत्रा पवार और उनके बेटे व राज्य सभा सांसद पार्थ पवार की राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ मुलाकात के बाद संगठन में बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। इस मुलाकात को पार्टी की संगठनात्मक रणनीति और भविष्य की तैयारी से जोड़कर देखा गया था। हालांकि, पार्थ पवार ने बाद में प्रशांत किशोर को अपना करीबी दोस्त और भाई जैसा बताते हुए मुलाकात को अनौपचारिक बताया था।
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में नेतृत्व का नया ढांचा तैयार हो रहा है। सुनेत्रा पवार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुकी हैं, जबकि पार्थ पवार भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में पार्टी के पुराने संगठनात्मक नेतृत्व और नए पवार परिवार केंद्रित नेतृत्व के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सुनील तटकरे लंबे समय से अजित पवार के करीबी नेताओं में रहे हैं। फरवरी में सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के दौरान तटकरे को महाराष्ट्र इकाई के प्रदेश अध्यक्ष पद पर दोबारा चुना गया था।
इसके बावजूद बाद में संगठन में बदलाव की अटकलें तेज हो गईं। पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से तटकरे के खिलाफ आवाज भी उठी। इसी बीच पार्टी के भीतर यह चर्चा सामने आई कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सुनील तटकरे के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर दो नामों की चर्चा सामने आई। इनमें वरिष्ठ नेता दिलीप वलसे पाटील और युवा नेता अनिल पाटील का नाम शामिल है।
दिलीप वलसे पाटील को पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने लंबे समय तक अजित पवार के साथ काम किया है और सरकार में वित्त, ऊर्जा, उच्च एवं चिकित्सा शिक्षा तथा गृह जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। वह 2009 से 2014 तक महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
वहीं, जलगांव के अमलनेर से विधायक अनिल पाटील को एनसीपी के युवा चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वह 2019 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और 2024 में भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। स्थानीय राजनीति और सहकारिता क्षेत्र के जरिए उन्होंने अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया और बाद में अजित पवार के करीबी नेताओं में शामिल हो गए।
हालांकि, अनिल पाटील ने प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने इस पद के लिए अपना नाम चर्चा में होने की खबरों को लेकर किसी तरह की पुष्टि नहीं की है।
उधर, दिलीप वलसे पाटील को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नेतृत्व को संकेत दिया है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता मंत्री पद नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक काम को मजबूत करना है।
सुनील तटकरे की प्रदेश अध्यक्ष पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर असहमति भी सामने आ चुकी है। NCP नेता भाऊसाहेब गोरे ने चुनाव आयोग का रुख करते हुए तटकरे की दोबारा नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
हालांकि, इन विवादों के बावजूद तटकरे पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। हाल के महीनों में भी वह एनसीपी की गतिविधियों और राजनीतिक फैसलों में सक्रिय नजर आए हैं।
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी का भविष्य किस नेतृत्व और किस संगठनात्मक ढांचे के तहत आगे बढ़ेगा। इसी साल जनवरी में विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और फरवरी में उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार की संगठन में सक्रियता बढ़ी और उन्हें राज्यसभा भेजा गया।
दूसरी ओर, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता अजित पवार की राजनीतिक टीम के पुराने और अनुभवी स्तंभ माने जाते हैं। मई में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद भी पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। उस समय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नई और पुरानी नेतृत्व शैली को लेकर खींचतान की खबरें भी सामने आई थीं।
रायगढ़ से सांसद सुनील तटकरे का राजनीतिक अनुभव और संगठन में उनकी पकड़ उन्हें एनसीपी के लिए महत्वपूर्ण बनाता है। वह चार दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं और अजित पवार के करीबी नेताओं में रहे हैं।
दूसरी ओर, तटकरे की जगह किसी नए चेहरे को लाना पवार परिवार का संगठन पर नियंत्रण तो मजबूत कर सकता था, लेकिन इससे तटकरे जैसे जनआधार वाले वरिष्ठ नेता को नाराज करने का जोखिम भी था। यही वजह है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी फिलहाल किसी जल्दबाजी से बचती हुई दिखाई दे रही है।