
जण गण मण पर मुकेश खन्ना का बयान ( फोटो सोर्स- Twitter/ANI)
Mukesh Khanna Jana Gana Mana Controversy: ‘शक्तिमान’ फेम अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने देश के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी राय रखी है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों का समर्थन किया, तो कई लोगों ने उनके ज्ञान और बयान की आलोचना की।
मुकेश खन्ना ने एक बातचीत में कहा कि वह पहले भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अभिनेता ने यह दावा भी किया कि ‘जन गण मन’ को लेकर इतिहास में अलग संदर्भ रहे हैं और इसे लेकर उनके मन में सवाल हैं।
हालांकि, उनके बयान में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच अंतर को लेकर भी भ्रम नजर आया। ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान है। इसलिए दोनों की संवैधानिक और आधिकारिक स्थिति अलग है।
मुकेश खन्ना के बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने उन पर राजनीतिक विचारों से प्रभावित होकर बयान देने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने लिखा कि मनोरंजन जगत से जुड़े कई लोग अपने करियर के अंतिम दौर में राजनीतिक मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं।
वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने खन्ना की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना चाहिए। कुछ लोगों ने उनके बयान को ‘प्रचार’ बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत विचार बताते हुए उनका बचाव भी किया।
दरअसल, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में निर्देश जारी किए गए हैं। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर 9 जुलाई 2026 को ‘राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को गाने या बजाने’ से संबंधित आदेश सूचीबद्ध है।
इन निर्देशों में दोनों के इस्तेमाल से जुड़े नियम और कार्यक्रमों में इनके क्रम को लेकर जानकारी दी गई है। ऐसे में मुकेश खन्ना का बयान उस समय आया है, जब ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में चर्चा पहले से जारी है।
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति की भावना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक रूप से गाया था। वहीं, ‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में आधिकारिक दर्जा प्राप्त है। दोनों ही रचनाओं का भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
मुकेश खन्ना के बयान ने एक बार फिर यह सवाल चर्चा में ला दिया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की भूमिका क्या है और दोनों के बीच अंतर को लेकर लोगों में कितनी स्पष्टता है। फिलहाल अभिनेता के बयान पर सोशल मीडिया पर बहस जारी है।
Updated on:
17 Aug 2026 11:07 am
Published on:
17 Aug 2026 11:07 am
