महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र के सभी सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों को कॉल का जवाब देते हुए अनिवार्य रूप से नमस्ते के बजाय 'वंदे मातरम' बोलना होगा। इस आदेश को लेकर महाराष्ट्र में एक नया विवाद शुरू हो गया है। सईद नूरी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक आदेश जारी किया। जिसमें फोन पर 'हैलो' की बजाय 'वंदे मातरम' (Vande Mataram) कहने के निर्देश दिए गए। सुधीर मुनगंटीवार के इस आदेश पर राज्य में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सुधीर मुनगंटीवार के इस आदेश का रजा अकादमी ने खुलकर विरोध किया है। रजा अकादमी के अध्यक्ष सईद नूरी ने कहा है कि वे इस बारे में मुस्लिम उलेमाओं और बाकी संबंधित लोगों से मशवरा करेंगे।
सईद नूरी ने कहा कि हम तो सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं। वंदे मातरम की जगह दूसरा विकल्प दिया जाना चाहिए। एक विकल्प दिया जाना चाहिए जो सभी को स्वीकार्य हो। हम उलेमा और संबंधित लोगों से इस पर चर्चा करेंगे। यह भी पढ़ें: आजादी के 75 साल बाद भी महाराष्ट्र के इस गांव में नहीं पहुंच सकी बस, शिक्षा से भी है वंचित
बता दें कि सईद नूरी ने कहा है कि वे सभी संबंधित लोगों से बात करके सरकार को आपत्ति जताते हुए एक पत्र लिखेंगे। विपक्ष की तरफ से भी इस पर तंज कसा जा रहा हैं। एनसीपी के नेता छगन भुजबल ने कहा है कि सीएम एकनाथ शिंदे भी सुधीर मुनगंटीवार से पूछ ले कि वे जय महाराष्ट्र कह कर अपना संबोधन शुरू करें या वंदे मातरम् कह कर? शिवसैनिक अपनी बातचीत की शुरुआत और अंत ‘जय हिंद, जय महाराष्ट्र’ कह कर ही करते हैं।
रविवार को शिंदे सरकार के मंत्रियों के विभागों के बंटवारा हुआ। इस दौरान बीजेपी की तरफ से मंत्री बने सुधीर मुनगंटीवार को वन, मत्स्य विकास और सांस्कृतिक मामलों के विभाग सौंपे गए। पिछली बार की बीजेपी-शिवेसना की सरकार में सुधीर मुनगंटीवार वित्त मंत्री थे। मंत्री बनने के बाद मुनगंटीवार ने कहा कि महाराष्ट्र के सभी सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों को कॉल का जवाब देते हुए अनिवार्य रूप से नमस्ते के बजाय 'वंदे मातरम' बोलना होगा। इस संबंध में आधिकारिक आदेश जल्द जारी किया जाएगा।
सुधीर मुनगंटीवार ने आगे कहा कि वंदे मातरम् महज एक शब्द नहीं बल्कि हर भारतीय की भावना है। इसपर रजा अकादमी ने यह स्पष्ट कह दिया है कि उनकी भावना वंदे मातरम् के साथ सुर मिलाने की नहीं है। उनके कौम के लोगों को वंदे मातरम की जगह दूसरा विकल्प दिया जाना चाहिए।