
Nitin Gadkari E20 Petrol Row: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में 36 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के आगे आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना ही पड़ा। जिसके चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस बीच शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक बयान ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। ठाकरे ने दावा किया कि अब मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वजह से विरोधियों के निशाने पर आ सकते हैं।
सीजेपी के जंतर-मंतर आंदोलन सफल होने के बाद रविवार सुबह मुंबई में उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई व मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने तिरंगा रैली निकली। इस दौरान अपने संबोधित में उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर तंज कसते हुए उन्हें पहले ‘गड्ढा मंत्री’ कहा। इसके बाद उन्होंने तुरंत चुटकी लेते हुए कहा, “माफ कीजिए, मेरा मतलब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी है।"
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि अब एथेनॉल का मुद्दा अगला बड़ा विषय बनने वाला है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी आजकल एथेनॉल पर काफी बोल रहे हैं और यह अगला बड़ा मुद्दा जरुर बनेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि विपक्ष आने वाले दिनों में एथेनॉल नीति को लेकर केंद्र सरकार और नितिन गडकरी पर हमला तेज कर सकता है। अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर भी तंज कसा।
उद्धव ठाकरे ने कहा, "वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गिरते रुपये और महंगाई पर बात नहीं करतीं, लेकिन पेपर लीक के फायदे गिनाने में लगी हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह देश की सुरक्षा करने के बजाय धर्मेंद्र प्रधान की रक्षा के लिए आगे आ गए। हमारे 'गड्ढा मंत्री' जी नहीं सड़क मंत्री नितिन गडकरी एथेनॉल की बात कर रहे हैं। यही अगला बड़ा मुद्दा बनने वाला है।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूं कि आपके प्रिय धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से हटाते समय आपको जरूर पीड़ा हुई होगी, लेकिन उससे कहीं अधिक पीड़ा उन परिवारों ने झेली है, जिनके बच्चों ने पेपर लीक के चलते आत्महत्या की। उन परिवारों की पीड़ा और तकलीफ को हम कभी नहीं भूलेंगे।"
छात्र आंदोलन के तेज होने से पहले देशभर में E-20 पेट्रोल यानी पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का मुद्दा काफी चर्चा में रहा था। कई वाहन मालिकों ने दावा किया था कि E-20 पेट्रोल की वजह से उनके वाहनों के इंजन पर असर पड़ रहा है। वाहन खराब हो रहे है, माइलेज गिरता जा रहा है।
इसके बाद नितिन गडकरी ने कहा था कि एथेनॉल युक्त पेट्रोल सुरक्षित है और अगर किसी को शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो उसे अधिक कीमत चुकानी होगी। इस बयान के बाद उनकी तीखी आलोचना हुई। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में दावा किया गया कि नितिन गडकरी के बेटे का एथेनॉल उत्पादन क्षेत्र से जुड़ा कारोबार है। उसे फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भविष्य में केंद्र सरकार डीजल में आइसोब्यूटानॉल मिलाने की योजना को हरी झंडी दे सकती है। इस बीच, सरकार ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक परीक्षणों और ऑटोमोबाइल उद्योग की स्वीकृति के बाद ही ई20 को अपनाया गया है। इसलिए ई0 या ई10 पेट्रोल पर वापस लौटने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।