मुंबई

स्थापना दिवस पर शिवसेना के दोनों गुटों का शक्ति प्रदर्शन, ‘ऑपरेशन टाइगर’ और उद्धव खेमे में फूट की चर्चाओं से गरमाई राजनीति

Operation Tiger Maharashtra: महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों ने अलग-अलग स्थापना दिवस मनाकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के शिंदे गुट में जाने की अटकलों ने राजनीति का माहौल और गरमा दिया है।
2 min read
• •
Updated: 19 Jun 2026, 12:50 PM IST
Operation Tiger Maharashtra, Eknath Shinde News, Uddhav Thackeray News
photo ani, ians

Operation Tiger Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति में शुक्रवार को शिवसेना का स्थापना दिवस चर्चा का बड़ा केंद्र रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कार्यक्रम आयोजित किए, तो दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी ने भी अलग से शक्ति प्रदर्शन किया। इसी बीच ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चल रही चर्चाओं ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है।

ऑपरेशन टाइगर की चर्चा तेज

इस बार स्थापना दिवस का महत्व इसलिए भी ज्यादा माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस शब्द का इस्तेमाल उन अटकलों के लिए किया जा रहा है जिनमें दावा किया जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के कई सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले समय में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।

छह सांसदों को लेकर दावा

इन अटकलों को तब और बल मिला जब शिवसेना के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जता चुके हैं और वे शिंदे गुट के साथ आने का मन बना चुके हैं। हालांकि, जिन सांसदों के बारे में यह दावा किया गया है, उनकी ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल इन चर्चाओं को राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

2022 में हुई थी बगावत

दरअसल, शिवसेना में राजनीतिक विभाजन की शुरुआत साल 2022 में हुई थी, जब एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई और महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला।

किसे मिली असली शिवसेना?

इसके बाद दोनों गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी लड़ाई भी चली। आखिरकार चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता दी और पार्टी का पारंपरिक धनुष-बाण चुनाव चिन्ह भी उसी गुट को आवंटित कर दिया। वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला गुट शिवसेना यूबीटी के नाम से अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखे हुए है।

आगे क्या होगा?

अब स्थापना दिवस के मौके पर दोनों गुट अपनी-अपनी ताकत और जनाधार दिखाने में जुटे हैं। वहीं ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चल रही चर्चाओं और संभावित राजनीतिक फेरबदल के कारण आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

Updated on:
19 Jun 2026, 12:50 PM IST
Published on: