मुंबई

‘शव को रखा जाए सुरक्षित’, ओमान तट पर मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक…बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

West Asia conflict: ओमान तट पर मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक दिक्षित सोलंकी के शव की वापसी के लिए परिजनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग।

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Apr 04, 2026
ओमान तट पर मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक

Bombay High Court: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आग अब भारतीय परिवारों को भी झुलसाने लगी है। दरअसल, ओमान तट के पास एक माल ले जाने वाली जहाज पर हुए मिसाइल हमले में भारतीय नाविक दिक्षित सोलंकी की मौत हो गई थी। अब उनके परिजनों ने सोलंकी के पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मृतक के पिता अमृतलाल गोकल सोलंकी और बहन मिताली सोलंकी ने केंद्र सरकार और संबंधित शिपिंग अधिकारियों के खिलाफ 'रिट ऑफ मेंडमस' जारी करने की मांग की है।

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क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, दिक्षित सोलंकी जहाज MT MKD Vyom के इंजन रूम में ऑयलर के पद पर तैनात थे। याचिका के तहत 1 मार्च 2026 को जहाज के कैप्टन सैडलर रिबेरो ने परिवार को मिसाइल हमले की जानकारी दी थी। शुरुआत में बताया गया कि विस्फोट और आग के कारण जहाज में छेद हो गया, जिससे सोलंकी लापताहालांकि, हालांकि बाद में पुष्टि हुई कि उनकी मौत हो चुकी है, जबकि चालक दल के बाकी 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। परिजनों का आरोप है कि सोलंकी को घायल अवस्था में ही जहाज पर छोड़ दिया गया था।

'अंतिम संस्कार हमारा अधिकार'

मिसाइल अटैक में मृतक के परिजनों ने अदालत में दलील दी है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उन्हें अपने परिजन के शव को प्राप्त कर सम्मानजनक अंतिम संस्कार करने का मौलिक अधिकार है। साथ ही, मर्चेंट नेवी एक्ट 2025 के तहत यह सरकार और अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे मृतक के अवशेषों को जल्द से जल्द स्वदेश लाएं।

सरकारी तंत्र पर उठते सवाल

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), विदेश मंत्रालय और दुबई स्थित भारतीय दूतावास से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, 24 मार्च 2026 को डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग ने सूचित किया कि यूएई अधिकारियों की ओर से शव की वापसी की प्रक्रिया में 23 दिनों की देरी हुई है। 18 मार्च को दुबई स्थित दूतावास ने बताया कि काफी प्रयासों के बाद मृतक के 'कंकाल अवशेष' बरामद हुए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक प्रक्रिया के लिए शारजाह पुलिस को सौंपा गया था। इसके बाद से परिवार को कोई अपडेट नहीं मिला है।

अदालत से की गई मुख्य मांगें

न्यायालय में परिजनों ने याचिका दायर करते हुए जज से गुहार लगाते हुए मांग क जिनमें मृतक के अवशेषों को जल्द से जल्द भारत लाकर परिवार को सौंजाए। इसकेए। इही, साथ ही उन्होंने हमले और मौत से जुड़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और फोटो साक्ष्य उपलब्ध कराने की भी मांग की है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

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