
Sanjay Nirupam: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने दिशा सालियान की मौत के मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और यूपीआई-रुपे से जुड़े पेमेंट चार्ज के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दिशा सालियान मामले की सीबीआई जांच मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका थी और पहले की जांच में कोई कमी या दबाव था या नहीं। दिशा सालियान मामले में सीबीआई की एफआईआर पर निरुपम ने कहा कि इस प्रकरण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
उनके अनुसार उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मुंबई पुलिस पर मामले की जांच को दबाने का आरोप लगा था। दिशा सालियान के पिता ने मामले की जांच की मांग मुंबई हाईकोर्ट के सामने रखी थी। अदालत के आदेश के बाद सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी मिली। निरुपम ने कहा कि अब सीबीआई की जांच से यह सामने आएगा कि मामले में किन लोगों की क्या भूमिका थी। उन्होंने आदित्य ठाकरे का नाम लेते हुए कहा कि जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि उनकी कोई भूमिका थी या नहीं। निरुपम ने मामले से जुड़े कुछ अन्य लोगों पर भी गंभीर टिप्पणियां कीं और उनके कथित आपराधिक या विवादित अतीत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सीबीआई मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच करेगी। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।
समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना यूसीसी के समर्थन में है। उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए की सरकार वाले राज्यों में आने वाले वर्षों में यूसीसी लागू करने की दिशा में काम होना चाहिए। निरुपम ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के कारण महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने की दिशा में यूसीसी महत्वपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य किसी धर्म की पहचान खत्म करना नहीं, बल्कि नागरिक कानूनों में समानता स्थापित करना है। निरुपम ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) को यूसीसी को लेकर कुछ आपत्तियां हो सकती हैं। उन्होंने जदयू से अपील की कि वह इस मुद्दे को धर्म के नजरिए से न देखें। निरुपम के अनुसार, यूसीसी लागू होने से विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और बच्चों को गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था बन सकती है। इससे अलग-अलग समुदायों के नागरिक अधिकारों के संबंध में एक समान व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
यूपीआई-रुपे पेमेंट चार्ज को लेकर निरुपम ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के छोटे लेनदेन करने वाले आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत 2,000 रुपए तक के भुगतान पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यूपीआई देश में रोजमर्रा के छोटे-बड़े आर्थिक लेनदेन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में छोटे डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने का फैसला आम लोगों के लिए राहत देने वाला है। निरुपम ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल और कम लागत वाला बनाए रखने से आम लोगों और कारोबारियों दोनों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े नियम भी स्पष्ट होने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं और कारोबारियों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।