Sanjay Raut BJP Washing Machine Politics: पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चुने जाने पर शिव सेना (UBT) नेता संजय राउत ने भाजपा की 'वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स' पर तीखा हमला किया है। राउत ने नारदा स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए भाजपा पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
Sanjay Raut attack on Suvendu Adhikari :पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। शिव सेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने शनिवार को भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे 'भ्रष्टाचार को पुरस्कृत करने' और 'वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स' का नाम दिया है।
संजय राउत ने साल 2014 के नारदा स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी उन तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं में शामिल थे, जिन्हें कैमरे पर कथित तौर पर नकद पैसे लेते देखा गया था। उन्होंने कहा कि 2016 के बंगाल चुनाव में भाजपा ने इन्हीं वीडियो का इस्तेमाल कर ममता बनर्जी सरकार को घेरा था, लेकिन शुभेंदु के भाजपा में शामिल होते ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट से वे वीडियो हटा दिए। राउत ने सवाल उठाते हुए पूछा, 'आज वही व्यक्ति मुख्यमंत्री बन गया है और भाजपा जश्न मना रही है। यह कैसी नैतिकता और कैसी विचारधारा है?' उन्होंने आगे कहा कि जिन पर ED के छापे पड़े, वे भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' में जाकर साफ हो गए और आज बड़े पदों पर बैठे हैं।
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार पर भी मीरा भयंदर में 254 एकड़ सरकारी जमीन के विवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने इसे 'सार्वजनिक भूमि की लूट' करार देते हुए सवाल किया कि इतनी बड़ी जमीन निजी बिल्डरों और कंपनियों के हाथों में कैसे चली गई?
आपको बता दें कि राउत के अनुसार, यह जमीन दशकों पहले लीज पर दी गई थी, लेकिन मीरा रियल एस्टेट डेवलपर्स और मीरा साल्ट वर्क्स जैसी निजी कंपनियों ने 1996, 2002 और 2018 के अदालती आदेशों के जरिए इस पर नियंत्रण हासिल कर लिया। उन्होंने संदेह जताया कि वरिष्ठ वकीलों के होने के बावजूद सरकार बॉम्बे हाई कोर्ट में यह केस कैसे हार गई? क्या जानबूझकर केस हारा गया? हालांकि, सरकार ने अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है, जिसका राउत ने स्वागत किया लेकिन पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
राउत ने मांग की है कि इस जमीन विवाद से जुड़ी कंपनियों और उनके राजनीतिक संबंधों का खुलासा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जनता की जमीन निजी हाथों में जाएगी, तो भविष्य में अस्पताल और सड़कों जैसे सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन कहां से आएगी?