मुंबई

‘आडवाणी के रथ पर सवार होकर दिल्ली की सत्ता तक पहुंची BJP’, संजय राउत ने मोदी-शाह पर कसा तंज

Sanjay Raut: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने PM नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि BJP लालकृष्ण आडवाणी के रथ पर सवार होकर सत्ता तक पहुंची, लेकिन बाद में उन्हें ही किनारे कर दिया।
3 min read
• •
Updated: 8 Nov 2026, 12:20 PM IST
Sanjay Raut
संजय राउत ने मोदी-शाह पर कसा तंज

Shiv Sena UBT: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में पहुंचने के बाद अपने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को किनारे कर दिया, जबकि पार्टी के राजनीतिक उत्थान में आडवाणी की बड़ी भूमिका रही है। राउत ने कहा कि बीजेपी “आडवाणी के रथ पर सवार होकर दिल्ली की सत्ता तक पहुंची।”

राउत ने कहा कि बीजेपी ने उन नेताओं को भुला दिया, जिन्होंने पार्टी की नींव रखी और उसे राजनीतिक शिखर तक पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और शाह के सत्ता में आने के बाद आडवाणी को हाशिए पर डाल दिया गया।

‘आडवाणी के बिना राम मंदिर आंदोलन नहीं होता’

संजय राउत ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में आडवाणी की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अगर लालकृष्ण आडवाणी नहीं होते तो राम मंदिर आंदोलन उस स्तर तक नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने अयोध्या रथ यात्रा और कारसेवा आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राउत ने कहा कि बीजेपी के राजनीतिक उत्थान और सत्ता तक पहुंचने में राम मंदिर आंदोलन का बड़ा योगदान रहा और इसके लिए सबसे ज्यादा श्रेय आडवाणी को दिया जाना चाहिए।

‘सत्ता में आने के बाद आडवाणी को गोदाम में डाल दिया’

राउत ने बीजेपी नेतृत्व पर आडवाणी की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने के बाद उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी को किनारे कर दिया। उन्हें गोदाम और डंपिंग ग्राउंड में डाल दिया गया।” उन्होंने कहा कि आडवाणी ने करीब 100 साल की राजनीतिक यात्रा में देश की राजनीति को प्रभावित किया और उनके जैसे नेताओं के मार्गदर्शन में काम करने का मौका उन्हें भी मिला।

राउत ने बीजेपी के साथ अपने पुराने गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि आडवाणी के शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के साथ अच्छे संबंध थे। उन्होंने दावा किया कि आडवाणी अक्सर बालासाहेब ठाकरे से राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा और सलाह के लिए मुलाकात करते थे। राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के भी आडवाणी के साथ करीबी संबंध रहे हैं।

‘राम मंदिर आंदोलन को पहचान देने वाले आडवाणी ही थे’

राउत ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे और लालकृष्ण आडवाणी ने बीजेपी को राजनीतिक शिखर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा बीजेपी नेतृत्व के दौर में आडवाणी को करीब 12 वर्षों तक राजनीतिक रूप से अलग-थलग रखा गया। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि जिस नेता ने राम मंदिर आंदोलन को पहचान और मजबूती दी, वही इस ऐतिहासिक मौके पर अलग-थलग रहा। उन्होंने आडवाणी को ‘लौह पुरुष’ बताते हुए कहा कि वह किसी के इशारे पर चलने वाले नेता नहीं थे।

अखिलेश यादव से माफी मांगने के बयान पर भी पलटवार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी राउत ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से राम मंदिर में दर्शन से पहले माफी मांगने को कहा था। राउत ने कहा कि माफी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगनी चाहिए। उन्होंने मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कभी उन पर कारसेवकों पर गोली चलाने का आरोप लगाया गया था, तो बाद में उसी मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण से सम्मानित क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि राम किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि सभी के हैं। राउत ने उन पोस्टरों की भी आलोचना की, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी को रामलला का हाथ पकड़कर मंदिर में ले जाते हुए दिखाया गया था। उन्होंने इसे भगवान राम का अपमान बताया।

किसानों के साथ दिवाली मनाने पर फडणवीस को घेरा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मंत्रियों द्वारा किसानों के घर जाकर दिवाली मनाने के फैसले पर भी राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक दिन किसानों के घर जाकर दिवाली मनाने से उनकी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।

राउत ने कहा कि किसानों की समस्याओं को समझने के लिए मंत्रियों को लगातार और बार-बार उनके घर जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि किसानों के घर पर परोसे जाने वाले दिवाली के नाश्ते की व्यवस्था किसानों ने खुद की थी या कलेक्टर कार्यालय के जरिए कराई गई थी। प्रधानमंत्री के जवानों के साथ दिवाली मनाने का जिक्र करते हुए भी राउत ने निशाना साधा और कहा कि ऐसे दिखावटी कार्यक्रमों से न तो चीन की घुसपैठ रुकी और न ही पुलवामा जैसी घटनाएं।

गोकुल दूध संघ विवाद पर भी लगाए आरोप

गोकुल सहकारी दूध संघ के विवाद को लेकर राउत ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि फडणवीस के निजी हितों के कारण कुछ निदेशकों की कथित तौर पर अवैध नियुक्तियां कराई गईं। राउत ने आरोप लगाया कि चुनाव हार चुके हसन मुश्रीफ और महाडिक को दोबारा साथ लाकर अध्यक्ष के चुनाव में बहुमत हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सतेज पाटील के पैनल ने चुनाव जीता था, लेकिन चुनाव अधिकारी ने पाटील के पैनल की जीती हुई दो सीटें हसन मुश्रीफ के पैनल को दे दीं।

राउत के मुताबिक, अगर ऐसा नहीं होता तो सतेज पाटील के पैनल के पास 15 सीटें होतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर किया जा रहा है और कहा कि शिवसेना इस चुनाव में हिस्सा लेगी।

Updated on:
8 Nov 2026, 12:20 PM IST
Published on: