
Sanjay Raut statement: संजय राउत ने मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मराठी में बोलते हुए कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए जीव विज्ञान के प्रोफेसरों को डीएनए (DNA) सैंपल भेजना चाहते हैं। इस दौरान उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि जो गुट महज चार साल पहले अस्तित्व में आया, उसका 60वां जन्मदिन कैसे मनाया जा सकता है? जिस गुट की आप बात कर रहे हैं, वह दरअसल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 'टेस्ट-ट्यूब बेबी' है। तो भला चार साल के टेस्ट-ट्यूब बेबी को 60 साल का सर्टिफिकेट कैसे दिया जा सकता है? यह जीव विज्ञान का कैसा अनोखा चमत्कार है?
कॉन्फ्रेंस के दौरान राऊत ने आगे तंज कसते हुए कहा कि कल (शुक्रवार) हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे की 'असली' शिवसेना के 60 साल पूरे हुए हैं, जो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मजबूती से खड़ी है। जबकि दूसरी तरफ चार साल पहले अमित शाह द्वारा एक टेस्ट-ट्यूब बेबी को रोपा गया था। इसके माता और पिता दोनों ही अमित शाह हैं; यह अपने आप में एक और चमत्कार है।
उद्धव गुट के कम से कम 6 लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल होने की खबरों (जिसे 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है) पर संजय राउत ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पाला बदलने वाले नेता 'बाघ' नहीं बल्कि 'लोमड़ियां' हैं, जिन्हें एक बाजार में खरीदा गया है। राउत ने गरजते हुए कहा कि यह कोई 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं है। जो लोग हमें छोड़कर भागे हैं, वे तो बिकाऊ थे। वे बाजार में आए और चूंकि शिंदे के पास बेहिसाब संपत्ति है, इसलिए उन्होंने उन्हें 'नीलामी' में खरीद लिया। असली बाघ तो आज भी उद्धव ठाकरे के साथ यहीं खड़े हैं। बाघों की सेना यहीं है!'
शनिवार सुबह संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद आक्रामक और रहस्यमयी इन्फोग्राफिक शेयर किया। इस पोस्ट में लिखा था कि कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं लेकिन वफादार नहीं होते। टइस पोस्ट को सीधे तौर पर पार्टी छोड़ने वाले बागी सांसदों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
इससे पहले, शुक्रवार को स्थापना दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने सत्ता और मुख्यमंत्री की कुर्सी की खातिर बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को तिलांजलि दे दी। शिंदे ने कहा, 'आप कुर्सी के लिए बालासाहेब के विचारों को भूल गए। जनता हमारे उस फैसले का समर्थन कर रही है जो हमने चार साल पहले (बगावत का) लिया था। बालासाहेब की विरासत दावों से नहीं, बल्कि काम से दिखनी चाहिए।'
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी भावुक और कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार को कहा था कि अगर उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सच साबित हो जाते हैं, तो वह अपने पद से हट जाएंगे, लेकिन वह शिवसेना को किसी 'चोर' के हाथ में कभी नहीं जाने देंगे।