
SIR Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की मांग पर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधते हुए इस मुहिम को राजनीतिक ड्रामा बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष आखिर किस आधार पर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहा है और इसके लिए जरूरी 400 वोट कहां से लाएगा?
मुंबई में बातचीत के दौरान शाइना एनसी ने कहा कि खरगे सिर्फ बयानबाजी और राजनीतिक दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष की ओर से करीब 400 नेताओं के समर्थन की बात पर भी सवाल उठाए। शाइना ने पूछा कि ये 400 नेता कौन हैं और इनके पास 400 वोट कहां हैं? उनका कहना था कि बिना किसी शिकायत के महाभियोग जैसी कार्रवाई की बात करना समझ से परे है।
शाइना ने विपक्षी नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि पहले उन्हें यह समझना चाहिए कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में क्या व्यवस्था है। संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी मांग उठाने से पहले नियमों और पूरी प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है।
दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और चुनावी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी विपक्ष ने नाराजगी जताई है।
अब विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को आगे बढ़ाने की तैयारी की है। इस मुहिम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी सक्रिय हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, शाइना एनसी ने विपक्ष की इसी कोशिश पर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना आसान नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना जरूरी होता है।
इस प्रक्रिया में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और मौजूद रहकर मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई वोट चाहिए। ऐसे में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त सांसदों का समर्थन जुटाना है। शाइना एनसी के 400 वोट वाले सवाल ने इस पूरी मुहिम को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।