
इन्फ्लुएंसर कियारा किंग को सताता था जान का डर ( सोर्स: x-@beeyonceknight/@ClavicularHD)
Kiara King Stalker: सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी के हर पल की झलक शेयर करने वाले इन्फ्लुएंसर्स को कई बार इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ती है। बता दें, लंदन में रहने वाली इन्फ्लुएंसर कियारा किंग के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। एक स्टॉकर ने उनकी जिंदगी में इस कदर डर पैदा कर दिया कि उन्हें अपनी और परिवार की सुरक्षा की चिंता होने लगी और हालात इतने बिगड़ गई कि उन्हें थेरेपी के साथ पुलिस और वकीलों की मदद भी लेनी पड़ी। कियारा ने दिए हाल के इंटरव्यू में अपने इस खौफनाक अनुभव के बारे में खुलकर बात की।
कियारा इन दिनों अपनी फिल्म 'द इन्फ्लुएंसर प्रोजेक्ट' के प्रमोशन में बिजी हैं। ये उनकी जिंदगी से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी है, जिसमें वो खुद का ही किरदार निभा रही हैं। फिल्म में उनका सामना एक ऐसे इंटरनेट स्टॉकर से होता है, जो उनकी हर ऑनलाइन पोस्ट पर नजर रखता है।
कियारा ने बताया कि स्टॉकर की हरकतों ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। वो लगातार डर और घबराहट में रहने लगी थीं। उन्हें अपनी जान के साथ-साथ परिवार की सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी थी।
इस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि हालात इतने खराब हो गए थे कि आधी रात को घबराहट के कारण उन्हें उल्टियां होने लगती थीं। उन्हें समझ नहीं आता था कि उनके साथ मौजूद वो व्यक्ति आगे क्या करेगा। कियारा के मुताबिक, ये सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी थी। स्टॉकर ऑनलाइन पोस्ट के जरिए उन्हें परेशान करता था और उनके विचारों को प्रभावित करने की कोशिश करता था। एक्ट्रेस ने कहा कि ये उनकी जिंदगी का सबसे बुरा दौर था। वो इतनी डरी हुई थीं कि घर से बाहर निकलने में भी डर लगता था अनजान शक्तियों का एहसास होता था और उन्हें सच में लगने लगा था कि कोई उन्हें मारना चाहता है।
कियारा ने बताया कि इस मुश्किल दौर से निकलने के लिए उन्हें काफी थेरेपी लेनी पड़ी। इस मामले में पुलिस और वकीलों की मदद भी शामिल रही। उन्होंने माना कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया, लेकिन इसी दौरान उन्हें अपनी अंदरूनी ताकत का भी एहसास हुआ। उनके मुताबिक, अगर वो इस मुश्किल दौर से नहीं गुजरतीं, तो शायद उन्हें अपनी मजबूती का अंदाजा कभी नहीं होता।
कियारा का मानना है कि 'द इन्फ्लुएंसर प्रोजेक्ट' में काम करने से उन्हें अपने पुराने मानसिक आघात का सामना करने में मदद मिली। फिल्म की वजह से उन्हें उस अनुभव को दबाने के बजाय उसके बारे में सोचने और उससे उबरने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि खुद को डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए उन्हें खुद ही पहला कदम उठाना पड़ा। उन्हें बिस्तर से उठकर ब्रीथवर्क क्लास तक जाना होता था। कियारा के मुताबिक, अगर वह अपने ट्रॉमा से भागती रहतीं, तो शायद उससे उबरने में उन्हें और ज्यादा समय लगता।
उन्होंने इस फिल्म के लिए आभार जताते हुए कहा कि अपने डर का सामना करना आसान नहीं था, लेकिन इससे उन्हें ठीक होने की प्रक्रिया में मदद मिली।
Updated on:
30 Oct 2026, 7:28 PM IST
Published on:
30 Oct 2026, 7:27 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.