
Sharad Pawar NDA Alliance Rumors: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से लगातार नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कांग्रेस में विलय की अटकलें सामने आईं, जिन्हें पार्टी नेताओं ने खारिज कर दिया। इसके बाद एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में विधायकों के साथ हुई बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। अब महायुति सरकार की किसान कर्जमाफी योजना की तारीफ के बाद एक बार फिर शरद पवार के एनडीए (NDA) में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
इसी बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने बड़ा बयान दिया है। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि शरद पवार ने महायुति सरकार की सराहना की है, तो उन्होंने कहा, "शरद पवार ने NDA सरकार की तारीफ की है, इसका मतलब है कि राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।" उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दरअसल, महायुति सरकार ने किसान कर्जमाफी योजना में शामिल दो विवादित शर्तों को वापस लेने का फैसला किया। इस फैसले का स्वागत करते हुए शरद पवार ने सोशल मीडिया पर सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उत्पादों के गिरते दामों के कारण किसानों की स्थिति पहले से ही कठिन थी। ऐसे में पहले लागू की गई दो शर्तों के कारण लाखों किसान कर्जमाफी योजना से वंचित होने की आशंका थी।
शरद पवार ने कहा कि सरकार ने किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए दोनों शर्तें वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके लिए सरकार बधाई की पात्र है। उन्होंने माना कि इस फैसले से बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलेगी।
दूसरी ओर, शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के बाद एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के भाजपा नीत एनडीए में शामिल होने की चर्चाओं को लेकर पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी।
सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए इन चर्चाओं को ‘चाय के कप में उठे तूफान’ जैसा बताते हुए साफ कहा कि एनसीपी (एसपी) के भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की सभी अटकलें पूरी तरह निराधार हैं। हालांकि, संजय शिरसाट के ताजा बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।