
Maharashtra Political Twist:शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने दिल्ली में एक और बड़ा दावा करते हुए महाराष्ट्र की राजनीति में सनसनी फैला दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी के असंतुष्ट (बागी) सांसदों को प्रलोभन के तौर पर 10 करोड़ अतिरिक्त दिए गए हैं और उन्हें सुरक्षा के बीच राजस्थान के किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए राउत ने साफ कहा कि इन 'गद्दारों' को दी गई पुलिस सुरक्षा तुरंत वापस ली जानी चाहिए, क्योंकि वे किसी सुरक्षा के हकदार नहीं हैं।
शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों को महाराष्ट्र पुलिस ने वाई-प्लस (Y-Plus) सुरक्षा प्रदान की है। पार्टी में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। राज्य गृह विभाग और खुफिया एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि सांसदों के आवासों और उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने पार्टी व्हिप की अनदेखी करते हुए संसद भवन स्थित शिवसेना (UBT) कार्यालय में आयोजित अहम संसदीय दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसे एकनाथ शिंदे गुट के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता माना जा रहा है। बैठक में केवल राज्यसभा सांसद संजय राउत और लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत तथा राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए, जबकि संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय (बंडू) जाधव, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टीकर अनुपस्थित रहे। सांसदों की इस बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों और शिवसेना (UBT) के भविष्य को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।
दरअसल, महाराष्ट्र की सियासत में पिछले कुछ दिनों से 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत उद्धव गुट के सांसदों के पाला बदलने की अटकलें तेज थीं। इन अफवाहों पर विराम लगाने और अपनी ताकत दिखाने के लिए शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सभी सांसदों के लिए तीन लाइन का सख्त व्हिप जारी किया था। इसके बाद दिल्ली स्थित पार्टी के संसद कार्यालय में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। संजय राउत ने इस बैठक से पहले ही सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया था कि जो कोई भी इस बैठक में नहीं आएगा, उसे हमेशा के लिए 'बेईमान और गद्दार' मान लिया जाएगा।