
Maharashtra Crime News: महाराष्ट्र विधानसभा में मंगलवार को एक ऐसा मामला गूंजा जिसने सभी को हैरान कर दिया। जिस युवती की हत्या के आरोप में उसके पिता और भाई को पुलिस ने जेल भेज दिया था, वही युवती अचानक जिंदा पुलिस थाने पहुंच गई। इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री व गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्वीकार किया कि पुलिस से गंभीर चूक हुई है। उन्होंने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराने का भी आश्वासन दिया।
विधानसभा में यह मुद्दा एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने उठाया था। जवाब देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मामले में पुलिस की भूमिका बेहद संदिग्ध और लापरवाहीपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित पुलिस निरीक्षक, उपनिरीक्षक और जांच में शामिल अन्य अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ विभागीय जांच भी की जाएगी, जिसे तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने का भी निर्देश दिया है।
पूरा मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के खकनार क्षेत्र की रहने वाली 26 वर्षीय शिवानी कालमेकर से जुड़ा है। अप्रैल में शिवानी अचानक लापता हो गई थी। उसी समय अरुण कालमेकर नाम का एक युवक भी गायब हो गया, जिसके साथ शिवानी के होने की आशंका जताई जा रही थी। इसी बीच मई के पहले सप्ताह में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के राजूरा बांध के पास एक सिर कटा और आंशिक रूप से जला हुआ महिला का शव मिला।
पुलिस ने बिना डीएनए जांच या अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के यह मान लिया कि शव शिवानी का है। इसी आधार पर पुलिस ने शिवानी के पिता बापूराव कालमेकर और भाई अजय को हिरासत में लेकर हत्या का आरोपी बना दिया। पुलिस का दावा था कि पूछताछ में दोनों ने हत्या की बात कबूल कर ली थी, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
28 मई को इस मामले ने नाटकीय मोड़ ले लिया। मध्य प्रदेश पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस को सूचना दी कि शिवानी जिंदा है। इसके बाद शिवानी खुद जळगांव जामोद पुलिस थाने पहुंची और बयान दिया कि वह पूरी तरह सुरक्षित है। उसने पुलिस से कहा, "मैं जिंदा हूं, मुझे कुछ नहीं हुआ है। मेरे पिता और भाई को तुरंत रिहा किया जाए।" जांच में पता चला कि शिवानी और अरुण (24) नासिक के पास रह रहे थे।
जेल से छूटने के बाद बापूराव और अजय कालमेकर ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि पुलिस उन्हें जंगल में ले गई, जहां उन्हें बेरहमी से पीटा गया और जुर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया गया। परिवार का आरोप है कि मामले से बचाने के नाम पर पुलिस ने 5 लाख रुपये की रिश्वत भी मांगी थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि राजूरा बांध के पास मिला सिर कटा और जला हुआ महिला का शव आखिर किसका था। उस महिला की हत्या किसने और क्यों की, यह रहस्य अब भी बरकरार है। पुलिस अब इस नए एंगल से मामले की जांच कर रही है।
इन आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और सरकार ने जांच के आदेश दिए। अब मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधानसभा में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है।