मुंबई

शिवसेना विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल- पार्टी में असली बहुमत कैसे तय होगा? जस्टिस बागची ने पूछे तीखे सवाल

Shiv Sena Election Symbol Case: शिवसेना के चुनाव चिन्ह और विधायकों की अयोग्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत तय करने की प्रक्रिया और पार्टी की आंतरिक संरचना पर सवाल उठाए। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि पार्टी में वास्तविक बहुमत कैसे तय होगा।
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Oct 06, 2026
Shiv Sena Election Symbol Case:
शिवसेना विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, फोटो सोर्स- ANI

Supreme Court Shiv Sena Case: शिवसेना के चुनाव चिन्ह और विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दल में वास्तविक बहुमत तय करने की प्रक्रिया पर अहम सवाल उठाए। मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि आखिर किसी पार्टी में बहुमत किस आधार पर तय किया जाए और क्या केवल संगठनात्मक ढांचे के आधार पर यह साबित किया जा सकता है कि किसी पक्ष के पास जमीनी समर्थन भी है।

करीब 15 दिनों के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मंगलवार को दो सत्रों में सुनवाई हुई, जिसमें पहले करीब आधे घंटे और फिर एक घंटे तक दलीलें सुनी गईं। नीरज किशन कौल ने अपनी दलीलें रखीं, लेकिन समय की कमी के कारण वह अपना पक्ष पूरा नहीं कर सके। अब बुधवार को भी मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

'बहुमत कैसे तय करेंगे?'

जस्टिस बागची ने सवाल किया कि अगर किसी राजनीतिक दल में वास्तविक बहुमत तय करना हो तो क्या जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की संख्या गिनना संभव है? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के लिए भी यह तय करना आसान नहीं है कि पार्टी में वास्तविक बहुमत किसके पास है। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में बहुमत तय करने का सही आधार क्या होगा?

संगठन में पद महत्वपूर्ण या जमीनी समर्थन?

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि किसी पार्टी की आंतरिक व्यवस्था ही लोकतांत्रिक नहीं है, तो पार्टी के संविधान के अनुसार पद पर बैठे व्यक्ति कानूनी रूप से वैध हो सकते हैं, लेकिन क्या इससे यह पता चल सकता है कि जमीनी स्तर पर उस पार्टी को वास्तव में कितना समर्थन हासिल है?

चुनाव चिन्ह के अधिकार पर भी सवाल

जस्टिस बागची ने चुनाव चिन्ह को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि अयोग्य ठहराए गए सदस्य पार्टी से बाहर चले जाते हैं और बाकी सदस्यों को अलग चुनाव चिन्ह मिलता है, तो ऐसी स्थिति में पार्टी के चुनाव चिन्ह पर अधिकार किसका होना चाहिए? उन्होंने सवाल किया कि जिन्होंने संवैधानिक पाप किया, उनके लिए पार्टी चिन्ह का महत्व लागू होगा या जिन्होंने उस संवैधानिक पाप के खिलाफ शिकायत की, उनके लिए?

कौल ने सुभाष देसाई मामले का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान नीरज किशन कौल ने सुभाष देसाई मामले का हवाला देते हुए कहा कि विधायकों की अयोग्यता का फैसला विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि व्हिप राजनीतिक पार्टी का होता है। कौल ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे पक्ष की ओर से इस मामले का संदर्भ सही तरीके से पेश नहीं किया गया और उसका गलत अर्थ निकाला गया।

बुधवार को भी जारी रहेगी सुनवाई

मंगलवार की सुनवाई के दौरान कई अहम संवैधानिक और संगठनात्मक सवाल सामने आए। हालांकि, समय की कमी के कारण नीरज किशन कौल अपनी दलील पूरी नहीं कर सके। अब सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी इस मामले पर सुनवाई होगी।

Updated on:
06 Oct 2026 05:20 pm
Published on:
06 Oct 2026 05:19 pm