
Mumbai High Alert: आर्थिक राजधानी मुंबई की सड़कें रविवार सुबह से ही भारी सुरक्षा बलों, ट्रैफिक डायवर्जन और आम लोगों के उत्साह से गूंज उठी हैं। दादर स्थित ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी पार्क और वीर सावरकर मार्ग पर 'विजय मार्च' में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में छात्र और युवा हाथ में तिरंगा लिए पहुंचे हैं। इस ऐतिहासिक भीड़ को संभालने के लिए मुंबई पुलिस को चप्पे-चप्पे पर अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा है।
यह पूरा घटनाक्रम देश भर में हुए छात्रों के उस उग्र आंदोलन और प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसके दबाव में आकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रतियोगी परीक्षाओं की धांधलियों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग कोनों तक छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व मोर्चा खोल रखा था। सरकार पर बने इस भारी नैतिक और रणनीतिक दबाव का असर यह हुआ कि आखिरकार मंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे ने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर इस छात्र आंदोलन का खुला समर्थन किया।
एकजुटता का संदेश: दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के युवाओं की ऐतिहासिक जीत है।
शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक: रविवार को आयोजित यह रैली केवल कोई विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की 'युवा शक्ति' और छात्र आंदोलन की इस बड़ी सफलता को सेलिब्रेट करने के लिए निकाली गई है। यह मार्च शिवाजी पार्क से शुरू होकर प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर तक पहुंचेगा।
उद्धव ठाकरे का बयान: उद्धव ठाकरे ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और इसे छात्र लोकतंत्र की जीत बताया।
राज ठाकरे का समर्थन: राज ठाकरे ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं ने सरकार को जमीन पर ला दिया है और यह रैली उनके संघर्ष को नमन करने के लिए है।
इस संयुक्त रैली और भारी जनसैलाब को देखते हुए मुंबई पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं:
सुरक्षा व्यवस्था: पूरे दादर, शिवाजी पार्क और वीर सावरकर मार्ग को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।
ट्रैफिक डायवर्जन: यात्रियों की सुविधा के लिए कई मुख्य रास्तों पर रूट डायवर्ट किए गए हैं, ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर उठी यह आवाज अब केवल छात्रों का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसने महाराष्ट्र समेत पूरे देश के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।