मुंबई

भाजपा के आगे टिक नहीं सका उद्धव-शिंदे सेना का गठबंधन, हुई करारी हार

भाजपा को हराने के लिए एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों ने गठबंधन किया था। एकनाथ शिंदे ने खुद धुर विरोधी उद्धव सेना के साथ मंच साझा कर इस गठबंधन का प्रचार किया था।
2 min read
• •
Updated: 10 Feb 2026, 9:47 AM IST
Devendra Fadnavis Eknath Shinde Uddhav Thackeray
BJP को पटखनी देने के लिए शिंदे-उद्धव सेना ने मिलाया था हाथ (Patrika Photo)

महाराष्ट्र के बार्शी तालुका में हुए जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र राउत के नेतृत्व में भाजपा (BJP) ने एक तरफा जीत हासिल की है। इस चुनाव में भाजपा ने जिला परिषद की सभी 6 सीटों और पंचायत समिति की सभी 12 सीटों पर कब्जा जमाया है। पिछले 20 वर्षों से पंचायत समिति पर राजेंद्र राउत का वर्चस्व कायम है और यह लगातार पांचवीं बार है जब उन्होंने यहां अपनी पकड़ बरकरार रखी है। इस जीत को राउत के लिए विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद एक बड़ी वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।

शिंदे ने BJP के खिलाफ किया था प्रचार

बार्शी के इस चुनाव में सबसे दिलचस्प बात यह थी कि भाजपा के खिलाफ दोनों शिवसेना और दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) ने मिलकर एक 'महाआघाडी' बनाई थी। इस गठबंधन का नेतृत्व उद्धव गुट के मौजूदा विधायक दिलीप सोपल कर रहे थे। महाआघाडी के प्रचार के लिए खुद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बार्शी आए थे और उन्होंने एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने के बाद ढाई करोड़ रुपये का फंड भी मंजूर किया था। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर भाजपा के सामने महाआघाड़ी टिक नहीं पाई।

फडणवीस करेंगे दौरा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की कसर निकालने के बाद अब राजेंद्र राउत ने कृषि उत्पन्न बाजार समिति, नगरपालिका और अब जिला परिषद व पंचायत समिति में जीत की हैट्रिक पूरी कर ली है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल भी सातवें आसमान पर है। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद राजेंद्र राउत ने जनता का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस जीत का जश्न मनाने और मतदाताओं को धन्यवाद देने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जल्द ही खुद बार्शी का दौरा करेंगे।

शिवसेना (उद्धव गुट) नेता दिलीप सोपल के नेतृत्व वाली महाआघाडी को इस चुनाव में एक भी सीट नसीब नहीं हुई। वो भी तब जब एक-दूसरे के कट्टर विरोधी एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव की शिवसेना (उबाठा) ने भाजपा को मात देने के लिए हाथ मिलाया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गठबंधन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भी दोनों गुट शरद पवार और अजित पवार शामिल थे। जबकि शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी अजित पवार गुट भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हैं, जो राज्य में सत्ता में है।

हालांकि इस गठबंधन पर स्पष्टीकरण देते हुए शिवसेना (उबाठा) के एक स्थानीय नेता ने कहा था कि यह समझौता केवल स्थानीय राजनीति और भाजपा को रोकने तक सीमित है। इसे राज्य स्तर पर किसी स्थायी गठबंधन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

Updated on:
10 Feb 2026, 9:47 AM IST
Published on: