
Shiv Sena: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों सियासी हलचल तेज है। एक ओर शरद पवार और सुनेत्रा अजित पवार के नेतृत्व वाली दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) पार्टियों के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, तो दूसरी ओर अब शिवसेना के दोनों गुटों के एक साथ आने की अटकलें भी शुरू हो गई हैं। इस बीच, शिवसेना शिंदे गुट के विधायक चंद्रकांत रघुवंशी ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे अगर एक साथ आ जाएं, तो वही असली दिवाली होगी। उनके इस बयान के बाद राज्य के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक चंद्रकांत रघुवंशी ने शिवसेना में हुई टूट को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि जिस दिन शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण दिन था। ऐसी स्थिति कभी पैदा ही नहीं होनी चाहिए थी।
रघुवंशी ने कहा कि शिवसेना में फूट होना दुखद था। पार्टी के दोनों गुटों के कई नेताओं ने पहले भी इस विभाजन को लेकर अपनी नाराजगी और पीड़ा जाहिर की है। अब शिंदे गुट के विधायक के इस बयान को दोनों गुटों के बीच संभावित सुलह की इच्छा के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों शिवसेना के एक होने की संभावना पर चंद्रकांत रघुवंशी ने बेहद भावुक और संकेत देने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे एक साथ आ जाते हैं, तो वही असली दिवाली होगी।
उनके इस बयान को महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने दोनों गुटों के विलय को लेकर किसी औपचारिक बातचीत या संभावित समझौते की जानकारी नहीं दी है। लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जरूर हवा दे दी है।
महाराष्ट्र में इन दिनों शरद पवार और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वरिष्ठ नेता शरद पवार से जुड़े घटनाक्रमों के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। दोनों पक्षों के नेताओं की मुलाकातों और बैठकों के दौर के बीच राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। ऐसे समय में शिंदे गुट के विधायक चंद्रकांत रघुवंशी का ठाकरे और शिंदे के एक साथ आने की इच्छा जताना चर्चा का विषय बन गया है।
अब सवाल यह है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों खेमे एकजुट होंगे और उसके बाद शिवसेना के दोनों गुटों के बीच भी सुलह की कोई राह निकलेगी? या यह केवल महज राजनीतिक अटकलों तक का मुद्दा बना रहेगा है। लेकिन शिवसेना नेता के बयान ने महाराष्ट्र की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।