शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि 2019 में बालासाहेब के विचार छोड़ने की वजह से रास्ते अलग हुए थे और अब परभणी में असली चेहरा सामने आ गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चंद्रपुर में मेयर चुनाव में कांग्रेस को झटका लगने के बाद अब सबकी नजर परभणी पर थी। यहां महाविकास आघाड़ी (MVA) ने बाजी मारते हुए मेयर पद पर जीत दर्ज की, लेकिन इस जीत के साथ ही सियासी घमासान भी तेज हो गया है।
परभणी महानगरपालिका में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) ने मुस्लिम नगरसेवक सैयद इकबाल सैयद खाजा को मेयर बनाया है। उनके नाम की घोषणा होते ही भाजपा और सत्ताधारी खेमे ने इसे मुद्दा बना लिया।
मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पहले ही समीकरण साफ हो चुके थे। समझौते के तहत मेयर पद शिवसेना (उद्धव गुट) के पास और डिप्टी मेयर पद कांग्रेस को देने का फैसला हुआ था। कांग्रेस की ओर से गणेश देशमुख को उपमहापौर चुना गया।
गुरुवार को हुए मतदान में सैयद इकबाल को 39 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार तिरुमाला मोकिंद खिल्लारे को 26 मत मिले। स्पष्ट बहुमत के साथ ठाकरे गुट ने परभणी में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। इस चुनाव में एनसीपी के नगरसेवक अक्षय देशमुख और रजिया बेगम द्वारा बीजेपी को वोट न देना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परभणी में ठाकरे गुट की शिवसेना द्वारा एक मुस्लिम पार्षद को मेयर बनाए जाने पर बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम और विधायक चित्रा वाघ ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। चित्रा वाघ ने कहा, "मुंबई में खान को मेयर बनाने का सपना टूट गया, इसीलिए परभणी को हरा रंग दे दिया क्या?"
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने भी इस चुनाव के नतीजे को लेकर उद्धव ठाकरे पर परोक्ष रूप से हमला बोला। शिंदे ने कहा, "2019 में उन्होंने बालासाहेब के विचारों को छोड़ दिया था, इसीलिए हमें अलग होना पड़ा। हम बालासाहेब के विचारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन परभणी में इनका असली चेहरा सामने आया है।"