Mumbai Mayor Election: शिंदे की शिवसेना को मुंबई के मेयर पद (BMC) से दूर रखने के लिए उद्धव ठाकरे गुट पर्दे के पीछे भाजपा का भी समर्थन कर सकती है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणाम आने के बाद मुंबई के अगले मेयर को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। एक तरफ जहां उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपनी पार्टी का मेयर बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) ने बेहद चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि शिंदे सेना को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे की पार्टी पिछले दरवाजे से भाजपा की मदद कर सकती है।
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इस पूरे मामले पर एक बड़ा बयान देकर खलबली मचा दी है। राउत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा किसी भी कीमत पर एकनाथ शिंदे का मेयर नहीं बनाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुंबई का अगला मेयर वही होगा जिसे उद्धव ठाकरे चाहेंगे। वह किसी भी दल का हो सकता है, लेकिन एकनाथ शिंदे की पार्टी का नहीं होगा।
राउत का यह बयान इस ओर इशारा कर रहा है कि शिंदे को बीएमसी की सत्ता से दूर रखने के लिए ठाकरे गुट भाजपा के साथ कोई गुप्त समझौता कर सकता है। राउत ने तंज कसते हुए कहा, पर्दे के पीछे की कहानी अभी बाकी है। हम अभी ‘वेट एंड वॉच’ की भूमिका में है।
मुंबई की राजनीति में चर्चा गर्म है कि क्या इस बार 2017 वाला फॉर्मूला अपनाया जाएगा? साल 2017 में भाजपा ने तत्कालीन अविभाजित शिवसेना का बीएमसी में मेयर बनवाने के लिए वोटिंग से पीछे हटने का फैसला किया था। अब अटकलें हैं कि उद्धव ठाकरे के 65 पार्षद वोटिंग के समय सदन से अनुपस्थित रहकर भाजपा की राह आसान कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बहुमत का आंकड़ा बदल जाएगा और भाजपा का मेयर निर्विरोध चुना जा सकता है। हालांकि, भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने ऐसी किसी भी बातचीत से इनकार किया है।
दूसरी ओर, शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसैनिकों की भावना है कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर मुंबई का मेयर शिवसेना का ही होना चाहिए। शिंदे ने अपने 29 पार्षदों को एक सुरक्षित होटल में शिफ्ट कर दिया है ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट से बचा जा सके। शिंदे खेमे का कहना है कि महायुति के गठबंधन में शिवसेना को कम से कम पहले ढाई साल के लिए मेयर पद मिलना चाहिए।
एकनाथ शिंदे ने सोमवार को कहा कि शिवसैनिकों के एक वर्ग की भावना है कि बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के वर्ष में मुंबई का मेयर शिवसेना का ही होना चाहिए, ताकि यह उनके प्रति सम्मान का प्रतीक बने। हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में उन अटकलों को खारिज किया जिनमें नए राजनीतिक समीकरण बनने की बात कही जा रही है।
शिंदे ने जोर देकर कहा कि मुंबई में मेयर भाजपा नीत महायुति का ही होगा और शिवसेना जनादेश के खिलाफ कोई फैसला नहीं लेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बीएमसी चुनाव भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन में मिलकर लड़ा था। इस जनादेश के खिलाफ कभी नहीं जाएंगे।
शिंदे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बीएमसी में मामूली बहुमत मिलने के बाद शिवसेना के 29 पार्षदों को मुंबई के एक होटल में ठहराए जाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इस पर स्पष्टीकरण देते हुए शिंदे गुट ने कहा कि यह कोई दबाव की राजनीति नहीं है, बल्कि नए सदस्यों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यशाला है। इसका उद्देश्य पहली बार पार्षद बने नेताओं को बीएमसी के कामकाज से परिचित कराना और पार्टी प्रमुख द्वारा उन्हें भावी अपेक्षाओं के बारे में बताना है।
बता दें कि बीएमसी की 227 सीटों में बहुमत के लिए 114 पार्षदों की आवश्यकता है। हालिया नतीजों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 65 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर है। शिंदे की शिवसेना के पास 29 सीटें हैं। जबकि उद्धव गुट की सहयोगी राज ठाकरे की मनसे को 6 सीटों पर सफलता मिली। वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं। वहीं ओवैसी की एआईएमआईएम ने 8, अजित पवार की एनसीपी को तीन, समाजवादी पार्टी (सपा) को दो और एनसीपी (शरद पवार गुट) को एक सीट पर जीत हासिल हुई। अगर विपक्षी महाविकास आघाडी एकजुट होता है तो उसके पास कुल 106 सीटें होंगी। यह आंकड़ा बीएमसी में मेयर बनाने के लिए बहुमत से सिर्फ 8 सीट कम है।